Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • अप्रैल में 85 प्रतिशत बढ़ी दुपहिया वाहनों की बिक्री
    • भारत की पहली फिल्म राजा हरिश्चंद्र को बनाने में लगे थे 15 हजार रुपए, मई 1913 में हुई थी प्रदर्शित
    • प्रियंका चोपड़ा इस बार नहीं होंगी मेट गाला का हिस्सा
    • नारद मुनि विष्णु के अनन्य भक्त हैं
    • पूजा में पत्नी का स्थान महत्वपूर्ण होता है
    • Iran-US: अमेरिका की नाक के नीचे से ईरान ने निकाला अपना ‘सुपर टैंकर’, होर्मुज से दो हजार करोड़ का तेल किया पार
    • अपराधियों की तलाश में रिश्तेदारों को परेशान करना गलत है : हाई कोर्ट
    • वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के नाश्ते में मिला कीड़ा, एक लाख जुर्माना
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»पूजा में पत्नी का स्थान महत्वपूर्ण होता है
    देश

    पूजा में पत्नी का स्थान महत्वपूर्ण होता है

    adminBy adminMay 4, 2026No Comments2 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    नई दिल्ली, 04 मई (ता)। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ को लेकर कई मान्यताएं हैं। जैसे यदि पति-पत्नी पूजा कर रहे हैं तो उन्हें जोड़े में पूजा करनी चाहिए। यदि दोनों गठबंधन जोडक़र पूजा करते हैं तो इसके ज्यादा फायदे हो सकते हैं। इसके अलावा उनकी पूजा में बैठने की स्थिति और दिशा का भी बहुत महत्व होता है। आमतौर पर किसी भी अनुष्ठान में पत्नी अपने पति के बायीं तरफ ही बैठती है। यदि हम शास्त्रों की बात करते हैं तो पत्नी को पति की अर्धांगिनी और वामांगी माना जाता है। मान्यता है कि स्त्रियों की उत्पत्ति भगवान शिव के बायें अंग से हुई है और माता पार्वती का स्थान भी उनके बायीं तरफ ही है। इसी वजह से शादी जैसी रस्मों में पत्नी हमेशा पति की बायीं तरफ ही बैठती है। लेकिन जब हम पूजा-पाठ में पत्नी के बैठने की बात करते हैं तो ज्योतिष उसे हमेशा पति के दाहिनी तरफ बैठने की सलाह देता है। हालांकि पत्नी को पति की वामांगी कहा जाता है, लेकिन पूजा जैसे पवित्र अनुष्ठान में पत्नियों को पति के दाहिनी तरफ ही बैठने की सलाह दी जाती है।
    इसके साथ ही उन्हें कुछ अन्य धार्मिक कामों जैसे बेटी के कन्यादान, किसी भी यज्ञ या हवन, बच्चे के नामकरण या अन्नप्रासन के समय भी पत्नियों को पति के दाहिनी ओर ही बैठना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि यदि पत्नी इसके विपरीत दिशा में बैठती है तो पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता है।
    ऐसी मान्यता है कि विवाह जैसे अनुष्ठान में दुल्हन हमेशा दूल्हे के बाएं हाथ की तरफ ही बैठती है क्योंकि बाईं तरफ ह्रदय का स्थान होता है और इस दिशा में बैठने से वो होने वाले पति के ह्रदय से जुड़ जाती है। वहीं पूजा-पाठ का संबंध ईश्वर से माना जाता है और इस दौरान पति-पत्नी का जुड़ाव ईश्वर भक्ति में लगाने के लिए ही उसे पति के दाहिनी तरफ बैठने की सलाह दी जाती है।
    ज्योतिष के अनुसार हमेशा से ही दाहिने हाथ को शक्ति और कर्तव्यों का प्रतीक माना जाता रहा है, इसी वजह से सभी काम दाहिने हाथ से ही करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही दाहिने हिस्से को भक्ति का प्रतीक माना जाता है और पूजा-पाठ के दौरान इसी दिशा में बैठने की सलाह दी जाती है। वहीं बायां हिस्सा प्रेम का प्रतीक माना जाता है, इसलिए पत्नी को शादी और इसकी रस्मों में बाईं ओर बैठाया जाता है।
    हिंदू शास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार पत्नी को हमेशा पूजा में अपने पति के दाएं हाथ की तरफ बैठना चाहिए। पूजा-पाठ के लिए यही दिशा सर्वाेत्तम है जिससे पूजा में ध्यान केंद्रित करने में भी मदद मिलती है। पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने और इसके शुभ लाभ के लिए यह नियम पालन करना अनिवार्य माना जाता है। धार्मिक कार्यों में पति-पत्नी के बैठने की दिशा का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है, जिससे जीवन में कई लाभ मिल सकें। ऐसा माना जाता है कि किसी को आशीर्वाद देते समय महिलाएं मां की भूमिका में आती हैं। दाहिना भाग हमेशा माता के स्थान को दर्शाता है। वाम भाग पत्नी का माना जाता है। पूजा में पत्नी पति के दाहिनी ओर बैठती है और जब विधि से पूजा पूर्ण हो जाती है तब उसे पति के बाएं स्थान पर आने को कहा जाता है।

    Desh New Delhi Religion tazza khabar tazza khabar in hindi The wife holds an important place in worship.
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    अप्रैल में 85 प्रतिशत बढ़ी दुपहिया वाहनों की बिक्री

    May 4, 2026

    भारत की पहली फिल्म राजा हरिश्चंद्र को बनाने में लगे थे 15 हजार रुपए, मई 1913 में हुई थी प्रदर्शित

    May 4, 2026

    प्रियंका चोपड़ा इस बार नहीं होंगी मेट गाला का हिस्सा

    May 4, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.