वॉशिंगटन/नई दिल्ली, 23 जनवरी। अमेरिका गत दिवस आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन से अलग हो गया है। अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग ने कहा है कि अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ से अपना नाम वापस लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का लंबे समय से चला आ रहा लक्ष्य पूरा हो गया है। ट्रंप ने एक साल पहले अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने के पहले दिन ही एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए अमेरिका के इस संगठन से बाहर निकलने के लिए नोटिस दिया था। इसके साथ ही अमेरिका ने संगठन का बकाया चुकाने से भी इनकार कर दिया है।
अमेरिकी कानून के मुताबिक, अमेरिका को विश्व स्वास्थ्य संगठन को छोड़ने से एक साल पहले नोटिस देना होता है और सभी बकाया फीस चुकानी होती है। अमेरिका पर वर्तमान में डब्ल्यूएचओ का लगभग 260 मिलियन डॉलर (करीब 2380 करोड़ रुपये) का बकाया है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस पैसे के चुकाने की संभावना कम है और विश्व स्वास्थ्य संगठन के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के संगठन से बाहर निकलने से दुनिया भर में पब्लिक हेल्थ को नुकसान होगा।
अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग ने कहा कि डब्ल्यूएचओ में तैनात सभी अमेरिकी सरकारी फंडिंग खत्म कर दी गई है और संगठन में तैनात सभी कर्मचारियों और कॉन्ट्रैक्टरों को वापस बुला लिया गया है। इसने यह भी कहा कि अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ की स्पॉन्सर कमेटियों, लीडरशिप बॉडी, गवर्नेंस ढांचे और तकनीकी वर्किंग ग्रुप में आधिकारिक भागीदारी बंद कर दी है। एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, श्हमारा ऑब्जर्वर के तौर पर हिस्सा लेने का कोई प्लान नहीं है और न ही दोबारा शामिल होने की योजना है।
रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जिनेवा में डब्ल्यूएचओ के मुख्यालय के बाहर से अमेरिकी झंडा हटा दिया गया था। हाल के हफ्तों में अमेरिका कई अन्य संयुक्त राष्ट्र संगठनों से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है। कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि हाल ही गठित ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस संयुक्त राष्ट्र को कमजोर कर सकता है।
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में ग्लोबल हेल्थ कानून के एक्सपर्ट डॉ. लॉरेंस गोस्टिन ने सीएनएन को बताया कि कानून के हिसाब से यह बहुत साफ है कि अमेरिका तब तक डब्ल्यूएचओ से आधिकारिक तौर पर अलग नहीं हो सकता, जब तक वह अपना बकाया वित्तीय भुगतान नहीं कर देता। लेकिन डब्ल्यूएचओ के पास अमेरिका को बकाया चुकाने के लिए मजबूर करने की कोई ताकत नहीं है।श् ॅभ्व् एक प्रस्ताव पास कर सकता है कि अमेरिका तब तक अलग नहीं हो सकता जब तक वह भुगतान नहीं करता, लेकिन वह शायद तनाव पैदा करने का जोखिम नहीं लेगा।
हालांकि एचएचएस ने संगठन के साथ सहयोग के लिए दरवाजा खुला रखा है। जब पूछा गया कि क्या अमेरिका अगले साल फ्लू वैक्सीन की संरचना तय करने के लिए डब्ल्यूएचओ के नेतृत्व में होने वाली आगामी बैठक में हिस्सा लेगा तो प्रशासन ने कहा कि बातचीत अभी भी जारी है। एचएचएस के प्रवक्ता ने कहा कि इस संगठन की वजह से अमेरिका को खरबों डॉलर का नुकसान हुआ। पत्रकारों से एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका को निवेश के बदले में ज्यादा कुछ नहीं मिल रहा है। अधिकारी ने बताया कि अमेरिका इस संगठन को सबसे ज्यादा फंड देने वाला देश था, लेकिन कभी डब्ल्यूएचओ का कोई महानिदेशक अमेरिकी नहीं रहा।
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