गुजरात और कर्नाटक के स्कूलों में राज्य सरकारें अजीज प्रेमजी फाउंडेशन एवं सत्यसाई अन्नपूर्णा ट्रस्ट के सहयोग से बच्चों को मोटे अनाज और कैलोरी युक्त भोजन उपलब्ध कराने के क्रम में कर्नाटक में नाश्ते में रागी हेल्म मिक्स और दूध दिया जाता है। सप्ताह के चार पांच दिन अंडे केले भी दिए जाते हैं। यह बच्चों को शिक्षा के प्रति आकर्षित करने की अच्छी योजना है। अब बच्चों को स्कूल में अखबार पढ़ने को मिलेगा जिससे वो देश दुनिया की जानकारी भी प्राप्त कर सके। २५ करोड़ स्कूली बच्चों की सेहत को सुधारने और पढ़ने में उनकी सोच मजबूत करने के लिए जो मिड डे मील योजना देने की तैयारी चल रही है वो प्रशंसा योग्य है क्योंकि कहते हैं कि पौष्टिक नाश्ता करने के बाद कुछ घंटे तक बच्चों में सीखने की क्षमता बढ़ जाती है। अब तो नाश्ते के साथ साथ दोपहर के भोजन की भी योजना को आगे बढ़ाने और इसे साकार करने की तैयारी चल रही है। केंद्र व प्रदेश सरकारे इसके लिए बधाई की पात्र है। मुझे लगता है कि प्रेमजी फाउंडेशन एवं सत्यसाई अन्नपूर्णा ट्रस्ट जैसे बच्चों को शिक्षा देेने में अग्रणी संस्थाओं के साथ ही अन्य एनजीओ को भी इसमें भूमिका निभानी चाहिए।
जब नीति निर्धारण की बात चल रही है तो यह भी पक्का है कि सरकार ने इस योजना को लागू करने की व्यवस्था की तैयारी भी कर ली होगी लेकिन जो मीडिया में पढ़ने को मिलता है उसे ध्यान में रखते हुए मेरा सुझाव है कि हर बच्चा साक्षर बने और परिवार अपने बच्चों को स्कूल भेजें इसके लिए जरूरी है कि जो मिड डे मिल में खाद्य सामग्री देने की योजना बनाई जा रही है वो पात्रों तक पहुंचे और परिवार बच्चों को स्कूल भेजें इसके लिए खाद्य सामग्री की शुद्धता बनी रहे और शिक्षक समय से स्कूल जाकर पढ़ाएं इसके लिए हर स्कूल के क्षेत्रों की नागरिकों की एक निगरानी समिति बनाई जाए और उसके फीडबैक पर कार्य हो। बच्चों के सामने आर्थिक समस्या ना हो इसके लिए फर्जी स्कूलों व बच्चों की फर्जी संख्या दिखाने वाले स्कूलों को बंद किया जाए और इससे जो पैसा बचे उसे बच्चों पर खर्च किया जाए तो मुझे लगता है कि सरकारी योजना साकार होगी और बच्चे जो सुविधाओ के अभाव में आगे नहीं बढ़ पाते वो भी अपनी भूमिका हर क्षेत्र में निभा सके इसके लिए कुछ कड़वे निर्णय भी सरकार ले और बंद होने वाले स्कूलों के शिक्षकों को निर्देश दिए जाएं कि वह अपनी योग्यता सिद्ध करें और जहां वह पढ़ा रहे थे वहां बच्चों की संख्या क्यों नहीं बढ़ी यह भी पूछा जाना चाहिए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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