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    Home»देश»लोकसभा राज्यसभा विधानसभा और विधानपरिषद सदस्यों की संख्या बढ़ोत्तरी पर पुनरू हो विचार
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    लोकसभा राज्यसभा विधानसभा और विधानपरिषद सदस्यों की संख्या बढ़ोत्तरी पर पुनरू हो विचार

    adminBy adminJune 30, 2026No Comments3 Views
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    लोकसभा राज्यसभा विधानसभा और विधानपरिषद के साथ ही महत्वपूर्ण पदों पर बैठने वाले सदस्यों की संख्या बढ़ाई जाए इस पर किसी को कोई ऐतराज नहीं है क्योकि जब सोचने वाले ज्यादा होंगे तो विकास भी गति से होगा और आम आदमी को न्याय मिलेगा और जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में काफी काम करा चुके हेांगे लेकिन इसके लिए पहले माहौल ऐसा हो कि इसके बाद जो खर्च बढ़ेंगे टैक्सो के रुप में उन्हें देने में आम आदमी को कोई परेशानी ना हो। एक खबर के अनुसार महिला आरक्षण कानून लागू करने के लिए सरकार संविधान संशोधन विधेयक का नया प्रारूप तैयार कर रही है। इसके तहत सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों की संख्या 50श् तक बढ़ाने समेत विभिन्न विकल्पों पर काम चल रहा है, ताकि दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं को दूर किया जा सके।
    नया प्रारूप मुख्य रूप से दक्षिण के राज्यों के इस डर को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से लोकसभा में उनका सियासी प्रभाव घट जाएगा। 17 अप्रैल को लाया गया पहला विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका था। नए प्रारूप में वर्ष 1971 की जनगणना के आधार पर राज्यों के बीच सीटों के मौजूदा अनुपात को बनाए रखने का प्रस्ताव दिया गया है। वर्तमान जनगणना के आंकड़े उपलब्ध नहीं होनेे से लोकसभा-विधानसभा सीटों का पुनर्गठन वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा।
    सूत्रों का कहना है कि सरकार इस विधेयक को संसद में तभी पेश करेगी, जब वह बहुमत को लेकर पूर्णतरू आश्वस्त हो जाएगी। वर्तमान में लोकसभा में एनडीए के पास करीब 300 सांसद हैं और तीन सीटें खाली हैं। दो-तिहाई बहुमत के लिए उसे 360 मतों की जरूरत है।
    सरकार की योजना के अनुसार, पिछली प्रकाशित जनगणना के आधार पर परिसीमन करके वर्ष 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को क्रियाशील करने के लिए लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 किया जाएगा। अप्रैल में पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने हेतु राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाई जाएंगी। विधेयक में कहा गया है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में बारी-बारी से आवंटित की जाएंगी।
    जिम्मेदारों द्वारा सोच के उपरांत जो यह संख्या बढ़ेगी उसकी वेतन और खर्चों को मिलाकर जो आर्थिक बोझ़ पड़ेगा वो कोई मामूली नहीं होगा। देशवासी इस समय सरकार के सभी प्रयासों व पीएम मोदी के निर्णयों के बावजूद पूरी तौर पर आर्थिक रुप से मजबूत नहीं हो पा रहे हैं। सही तो यह है कि व्यापारी हो या उद्योगपति व आम आदमी अपनी व्यवस्था बनाने में १८ घंटे काम करते हुए एडी से चोटी तक का जोर लगा रहा है। फिर भी किसी ना किसी रुप में महंगाई से हो रहे सामना और बढ़ते खर्चे उसे उभरने नहीं दे रहे हैं। क्योंकि सरकारी विभाग विभिन्न करों के नाम पर टैक्स की वसूली में पीछे नहीं है। इसलिए बढ़ोत्तरी हो मगर पहले आम आदमी का बजट सुधारने और महंगाई व टैक्स का असर उस पर ना पड़े इसलिए ऐसा होने तक इस प्रस्ताव पर दोबारा विचार किया जाए।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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