एक जमाना था जब लड़के लड़की एक दूसरे को देखे बिना ही शादी कर लेते थे और पूरा जीवन खटटे मीठे अनुभवों के साथ कट जाता था मगर उसके बाद धीरे धीरे समाज में जागरुकता बढ़ी तो विवाह से पूर्व लड़के लड़कियों को देखने और आपस में बात कराने का अवसर दिया जाने लगा। बाद में जैसे ही रिश्ते की बात चली एक दूसरे के फोन नंबर लेकर बात शुरु हुई और मुलाकातें होने लगी। अब तो इतनी जागरुकता आ गई है कि किसी वजह से धोखे से किसी लड़के से शादी तय कर दी गई और बाद में कमी नजर आई तो जयमाला और फेरों के समय लड़की उसकी कमी बताकर शादी से इनकार कर देती है। पिछले दिनों दूल्हा दुबला है मैं ससुराल नहीं जाऊंगी कहकर एक दुल्हन ने बारात लौटा दी। हमें लगता है कि यह कुछ गलत भी नहीं है कि अगर शादी के बाद दोनों मिलकर नहीं रह सकते तो अच्छा यही है कि शादी से पहले ही ना हो जाए क्योंकि पूरे जीवन घुटकर जीने या नीले ड्रम जैसी घटनाएं हो वो अच्छा नहीं है। मां बाप को ऐसे मामलों में अपने बच्चों की भावनाओं का आदर करने की प्रवृति अब बना लेनी चाहिए।
पूर्व में समलैंगिंग संबंधों को लेकर बात करने से हर कोई बचता था लेकिन अब पिछले कई सालों से समलैंिगगों द्वारा अपने अधिकारों को लेकर प्रदर्शन किए जाते हैं। दिल्ली के एक नामी प्रोफेसर को अपने पुत्र के लिए एक ल ड़का देखे जाने की खबर पढ़ी थी तो कई बड़े खानदानों के लोग भी इस पर मुखर हो रहे हैं। मीडिया में अपने बयान देते हैं इस पर चर्चा करते हैं। मेरा मानना है कि जब समाज में जागरुकता आ गई है बच्चों की भावनाओं का आदर किया जाता है। ऐसे में दोनों लड़किया या दोनों लड़के सक्षम है और जीवन बिना कठिनाई के गुजार सकते हैं तो कई देशों में इन संबंधों को दी गई मान्यता को देखते हुए इस समस्या का समाधान होना चाहिए क्योंकि पिछले दिनों मेरठ में अपना इलाज कराने गोंडा से आई एक महिला का जिस मकान में रहकर वह इलाज करा रही थी उसके मालिक की बेटी से प्रेम हो गया और पति से तलाक की नौबत आने लगी। दोनों परिवारों ने मामले का निस्तारण करने की कोशिश की है लेकिन जिस प्रकार गोंडा निवासी महिला मेरठ की युवती से मिलने यहां पहुंच गई वो इस बात का प्रतीक है कि आसानी से इन संबंधों का निस्तारण होने वाला नहीं है। क्योंकि प्रेम सिर चढ़कर बोलता है। कितने ही मामले खुलकर सामने नहीं आते लेकिन कुछ समलैंगिंक खुलकर बात करते हैं। इसके उदाहरण के रुप में बीते दिनों शामली के बाबरी क्षेत्र के गांव निवासी एक युवती बरेली की एक युवती के साथ नोएडा की फैक्ट्री में काम करती थी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में इन्होंने शादी करने का दावा किया और सात फेरे लेने की बात कही। बरेली निवासी युवती ने तो एसपी के नाम प्रार्थना पत्र भ्ीा प्रदर्शित किया है। फिलहाल एसपी एनपी सिंह ने कहा है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। अगर आता है तो नियमानुसार जांच की जाएगी। शुरु से ही युवती के परिजन मजदूरी के सिलसिले में बाहर गए थे। बचपन से ही युवती लड़कों की तरह रहती थी। पैंट शर्ट पहनना बाइक चलाना इसका शौक था। इन दोनों मामलों को देखकर यह कहा जा सकता है कि सरकार को इस बारे में निर्णय लेना चाहिए और अदालतों में ऐसे विचाराधीन मामलों का निस्तारण हो और हम मानवीय अधिकारों की बात करते हैं। तो फिर मुझे लगता है कि जो मां बाप अपने बच्चों की परेशानी को ध्यान में रखकर दोनों के विवाह करा देते हैँ उनकी सोच को विस्तार देते हुए हमें कोशिश करनी चाहिए कि जल्दी सुधार हो और नहीं होता है तो दोनों की शादी कराने में ही भला है। एक गांव में दो लड़कों ने शादी की और लोगों को दावत दी और उनके मां बाप भी राजी हो गए। मैं यही कह सकता हूं कि यह व्यवस्था ठीक नहीं है लेकिन इनके कारण लोगों को परेशानी होती है। इसलिए ऐसे मामलों में सरकार निर्णय लेकर पालन कराए। कई बार ऐसा पढ़ने को मिला कि समलैंगिक संबंधों को मान्यता न मिलने पर किसी एक या दोनों ने आत्महत्या कर ली। इसलिए इन जैसी घटनाओं से बचने के लिए स्पष्ट नियम बनने जरुरी है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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