पिछले कुछ सालों से देश की सर्वोच्च सेवा आईएएस से इस्तीफा देने या वीआरएस लेने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। अभी राजस्व विभाग में तैनात आईएएस रिंकू सिंह राही ने इस्तीफा देने की बात की तो अब विशेष सचिव ग्राम विकास आईएएस रजनीश चंद्र ने वीआरएस की मांग की है। उससे पहले भी ऐसे प्रकरण मिलते रहते हैं। विकास गोठलवाल जैसे अधिकरियों का नाम भी चर्चा में आ चुका है लेकिन रिंकू राही ने तो साफ कहा था कि उन्हें काबिलियत के अनुसार काम नहीं दिया जा रहा और बिना काम के वेतन क्यों। इसलिए उन्हें उनके पुराने विभाग में भेज दिया जाए।
किसे नौकरी करनी है किसे नहीं यह अपनी सोच का विषय है और हर कोई निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। मगर आईएएस जैसी सेवा के लिए हमारे युवा भरपूर प्रयास करते हैँ उससे इस्तीफा देने की नौबत क्यों आ रही है इस पर सोचने की जरुरत सरकार उच्च अफसरों व जनप्रतिनिधियों के लिए बहुत जरुरी है क्योंकि सुनने को मिलता है कि एक आईएएस बनने तक जहां परिवारों का बहुत खर्च आता है वहीं सरकार का भी इस पर काफी खर्च होता है क्योंकि इससे सामाजिक व्यवस्था और सम्मान जुड़ा होता है। कहते भी हैं कि सरकार को आईएएस ही चलाते हैं। ऐसे में इस्तीफे के कई कारण हो सकते हैँ कि या तो व्यवस्था बनाने वालों के साथ न्याय नहीं हो रहा अथवा जानबूझकर निर्णय लेने वाले अपने कृपापात्रों को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें कुंठित करने में लगे हैं या बड़ी कंपनियों में मिलने वाले अच्छे वेतन या आईएएस की ट्रेनिंग के दौरान इंस्टीटयूट में पढ़ाना भी आकर्षित करता है। मेरा मानना है कि सरकार सर्वे कराकर देखें कि अफसर ऐसा क्यों कर रहे हैं। मान सम्मान मिलने के बाद भी अगर कोई इस्तीफा दे रहा है तो यह समझ लेना चाहिए कि बड़ी कमी व्यवस्था में पनप रही है जो सही नहीं है। इस समस्या का समाधान जल्द खोजा जाना चाहिए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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