Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • दिल्ली के बेड़े में शामिल हुईं 300 नई इलेक्ट्रिक बसें, गृह मंत्री अमित शाह ने दिखाई हरी झंडी
    • आज की बारिश ने कमजोर मानसून की कमी को किया पूरा, मौसम के बदलाव से बढ़ती है मुसीबत
    • लकड़ी और कार्ड बोर्ड के होटल नुमा घर पेड़ों पर टांग दिए जाएं तो मधुमक्खियों की भांति पक्षी भी बिना डर के रह सकते हैँ
    • पेट्रोल पंपों पर मिले जरुरी सुविधाएं! इथनॉल अगर कच्चे तेल की कमी पूरी करता है तो अच्छा है लेकिन उपभोक्ताओं की शंका का समाधान करने के लिए पारदर्शी व्यवस्था जरुरी है
    • पशुओं से होता है रोग भ्रम फैलाने की बजाय किस जानवर से क्या क्या नुकसान हो सकता है यह बताना चाहिए, गोलमोल कथन से तो व्यवस्था ही बिगड़ जाएगी
    • अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में गुजरात हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 38 दोषियों की फांसी की सजा बरकरार
    • पहली बारिश के बाद एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता पर उठे सवाल
    • ‘शहजाद भट्टी’ गैंग के 2 आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, 6 गिरफ्तार
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»नफरती भाषण समाज के लिए गंभीर खतरा, पर वर्तमान कानून पर्याप्त : सुप्रीम कोर्ट
    देश

    नफरती भाषण समाज के लिए गंभीर खतरा, पर वर्तमान कानून पर्याप्त : सुप्रीम कोर्ट

    adminBy adminApril 30, 2026No Comments4 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    नई दिल्ली, 30 अप्रैल (ता)। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नफरती भाषण और अफवाह फैलाना
    समाज के लिए गंभीर खतरा है, लेकिन ऐसे मामलों से निपटने के लिए पहले से मौजूद कानून पर्याप्त हैं, जरूरत सिर्फ उनके सही तरीके से पालन की है। शीर्ष अदालत ने मामले में अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी करने से इन्कार करते हुए साफ किया कि मौजूदा कानूनों में कोई खालीपन नहीं है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि नए आपराधिक कानून बनाना अदालत का काम नहीं है। यह जिम्मेदारी संसद और विधानसभाओं की है। अदालत कानून की व्याख्या कर सकती है, उसका पालन सुनिश्चित करा सकती है, पर वह सरकार को नया कानून बनाने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। नफरती भाषण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिकाओं पर फैसले में पीठ ने कहा, ऐसे भाषणों से भाईचारा, सम्मान एवं सांविधानिक व्यवस्था प्रभावित होती है। लिहाजा, सरकार व विधायिका समय-समय पर बदलते हालात को देखते हुए नए कानून या नीतियों पर विचार कर सकते हैं। पीठ ने कहा, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और पहले की दंड प्रक्रिया संहिता में इनसे निपटने के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं। कोर्ट ने दोहराया, किसी संज्ञेय अपराध की सूचना पर पुलिस के लिए एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। यह सिद्धांत पहले ललिता कुमारी मामले में तय किया जा चुका है। याचिकाओं में ऐसे मामलों से निपटने के लिए तंत्र बनाने की भी मांग की गई थी।

    but existing laws are adequate: Supreme Court Court Order Desh Hate speech poses a serious threat to society New Delhi tazza khabar tazza khabar in hindi
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    दिल्ली के बेड़े में शामिल हुईं 300 नई इलेक्ट्रिक बसें, गृह मंत्री अमित शाह ने दिखाई हरी झंडी

    July 7, 2026

    आज की बारिश ने कमजोर मानसून की कमी को किया पूरा, मौसम के बदलाव से बढ़ती है मुसीबत

    July 7, 2026

    लकड़ी और कार्ड बोर्ड के होटल नुमा घर पेड़ों पर टांग दिए जाएं तो मधुमक्खियों की भांति पक्षी भी बिना डर के रह सकते हैँ

    July 7, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.