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    Home»देश»सबरीमाला मंदिर मामले में सरकार दखल ना देकर जजों की पीठ को फैसला करने दे
    देश

    सबरीमाला मंदिर मामले में सरकार दखल ना देकर जजों की पीठ को फैसला करने दे

    adminBy adminApril 7, 2026No Comments9 Views
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    मामला वैसे तो अदालत में विचाराधीन है इसलिए कोई टिप्पणी करना सही नहीं है लेकिन केरलम के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री के बारे में जो कहा कि अदालतें धार्मिक मामलों में दखल ना दें वो कुछ अजीब सा लगता है। परंपरागत रुप से १० से ५० साल की महिलाओं के प्रवेश पर रोक बताई जाती है क्योंकि भगवान अयप्पा को नैष्ठिक ब्रहमचारी माना जाता है इसलिए इस उम्र की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है लेकिन दो जनवरी २०१९ को बिंदु कनकदुर्गा (45) और बिंदु अम्मिनी (46) ने पुलिस सुरक्षा में काले कपड़े पहनकर मंदिर में प्रवेश किया। भले ही यह पुलिस सुरक्षा में हुआ हो मगर दो महिलाएं जा चुकी हैं तो परंपरा तो अब टूट चुकी है। दूसरी ओर धार्मिक आस्था और मान्यता को किसी प्रकार से चुनौती नहीं दी जा सकती। मगर देश में तो महिलाओं को मातृशक्ति मानकर पूजा जाता है और उन्हें बराबर का दर्जा देने के लिए महिला आरक्षण हर क्षेत्र में लागू करने और संसद व विधानसभाओं में भी आरक्षण दिए जाने की बात चल रही है। बहुत से परिवारों में क्या धार्मिक क्षेत्रों में भी अनेक ब्रहमचारी रहे हैं लेकिन ऐसा सुनने में नहीं आता है। इसलिए जनमानस की इस बात से मुझे भी लगता है कि सरकार को तो इस मामले में दखल देना ही नहीं चाहिए। जो फैसला नौ जजों की पीठ सात सवालों के जवाब में सोच समझकर फैसला दे उसे मान्य किया जाए। समाज की व्यवस्था और महिलाओं की प्रतिष्ठा को ध्यान में रख मुझे लगता है कि इस मुददे पर देश के धार्मिक जनों और मंदिरों के पुजारियों की एक पीठ बनाई जाए और उसके सामने यह मुददा रख इस पर विचार होना चाहिए। अगर वो पीठ महिलाओं के प्रवेश के पक्ष या विपक्ष में फैसला देती है तो इस बिंदु को सबरीमाला मंदिर के पुजारियों पर छोड़ा जाए कि वो इस पर निर्णय ले। मेरा मानना है कि इस प्रतिबंध पर सुधार होना ही चाहिए और जहां तक महिलाओं के प्रवेश की बात है तो अब समय परिवर्तन हो रहा है तो सबको ऐसे मुददे पर विचार करना वक्त की आवश्यकता है।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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