मुरादनगर 29 मई। गाजियाबाद विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बसपा ने अपनी राजनीतिक तैयारी तेज कर दी है। जिले की पांचों विधानसभा सीट पर मजबूत पकड़ रखने वाले संभावित प्रत्याशियों की तलाश शुरू कर दी हैं। उसी रणनीति के तहत हाल ही में पिछले तीन महीने पूर्व बसपा से निष्कासित किये गये मुरादनगर के पूर्व विधायक बहाव चौधरी का बसपा सुप्रीमो मायावती ने निष्कासन रद्द कर दिया हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआइआर) के बाद से पार्टी के पदाधिकारी बूथ स्तर पर सक्रियता दिखा रहे हैं ओर बकायदा विधानसभा रिपोर्ट के आधार पर जिताऊ चेहरे तलाश किये जाने पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई हैं।
बसपा के अभियान के दौर में जहाँ एक ओर बूथ कमेटी के गठन पर विशेष जोर दिया जा रहा हैं। वर्ष 2012 की तर्ज पर संगठन की मजबूती में जुटी बसपा ने अब विधानसभावाईज जिताऊ उम्मीदवारों पर फिर फोकस करना शुरू कर दिया हैं उसी का परिणाम हालिया सामने दिख रहा हैं कि मुरादनगर के पूर्व विधायक वहाव चौधरी को बसपा सुप्रीमो मायावती के आदेश पर गाजियाबाद के जिला अध्यक्ष मनोज कुमार जाटव ने 17 मार्च को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते वहाव चौधरी को निष्कासित किया था। गुरुवार को बसपा जिलाध्यक्ष ने बसपा सुप्रीमो के आदेश पर उनका निष्कासन रद्द कर उन्हें फिर से पार्टी में वापस ले लिया हैं। वहाब चौधरी की बसपा में वापसी होने के साथ ही मुरादनगर विधानसभा क्षेत्र के अन्य दलों के नेताओं में भी खलबली मच गई है। पार्टी आलाकमान के सूत्रों की माने तो उनके निष्कासन की वापसी स्क्रीनिंग (छानवीन) के बाद ही ली गई हैं।
मोदीनगर से लेकर अन्य सीटों पर उम्मीदवारों की तलाश शुरू
अब मोदीनगर विधानसभा से ब्राहमण व जाट उम्मीदवार की तलाश में पार्टी आलाकमान लगा हैं। विधानसभा के जातिगत आंकडो के आधार पर प्रभावशाली नेता का नाम घोषित करने की तैयारी तेज हैं। मेरठ मंडल के कोर्डिनेटर सतपाल तितला, मेघानंद जाटव, कपिल गौत्तम, अनिल गौतम व सतेंद्र प्रधान सौदा की ओर से हाईकमान ने रिपोर्ट तलब कर ली हैं। लोनी, साहिबाबाद व गाजियाबाद सीट पर भी सक्रियता बढ़ी हैं। यहाँ पार्टी के पदाधिकारी अनुसूचित जाति के साथ होने वाली घटनाओं की सूचना मिलने पर पीडितों से मिलकर जानकारी ले रहे हैं। मंडल और जिला स्तर पर बैठके तेज हो गई है। पार्टी से जुड़े रणनीतिकारों का कहना है कि इस बार प्रत्याशी चयन के लिए कई मानक होंगे। जातीय समीकरण, क्षेत्र में सक्रियता, जनसंपर्क, संगठन से जुड़ाव और स्थानीय प्रभाव को भी अहम आधार बनाया जाएगा। बसपा ऐसे चेहरों को आगे लाने की तैयारी में है, जिनकी जनता के बीच पहचान मजबूत हो और जो विभिन्न वर्गों में सहज स्वीकार्यता रखते हों। बसपा की रणनीति फिलहाल शांत रहकर संगठन को मजबूत करने और हर विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक समीकरण समझने की है। माना जा रहा है कि इस बार जिले की पांचों विधानसभा में टिकट वितरण में मैदान में ऐसे प्रत्याशी उतारे जायेगे जो पार्टी को मजबूत स्थिति में ला सके।

