केंद्र सरकार द्वारा सार्वजनिक उपक्रम लगाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से पूर्व में समय समय पर काफी भूमि ली गई यह लेदर फैक्ट्री, लाल इमली कपड़ा उद्योग जैसे उपक्रम लगाने के लिए यह भूमि ली गई थी मगर बताते हैं कि ज्यादातर उद्योग बंद हो गए हैं और उनकी जमीन इनमें घिरी हुई है। बीते दिनों यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ जी द्वारा इस बारे में निर्णय लिया कि राज्य सरकार शहरों में लोगों की आवासीय जरुरतों को पूरा कराने के लिए यह भृमि खाली कराकर वहां अपार्टमेंट बनाएगी। इसकी जिम्मेदारी सीएम ने स्टेट ट्रांसर्मेशन कमीशन को सौंपी जिसने सभी मंडलायुक्तो को पत्र भेजकर इस बारे में रिपोर्ट मांगी गई बताई गई है। प्रदेश सरकार का यह निर्णय समयानुकुल और आए दिन खेती की जमीन इन कामों के लिए अधिगृहित की जा रही हैं उन पर रोक लगाने के लिए महत्वपूर्ण कह सकते हैं। मेरा मानना है कि मुख्यमंत्री को अदालतों में चल रहे मामलों की पैरवी कराकर उन्हें भी जल्द खाली कराकर इस भूमि का सदुपयोग शुरु करना चाहिए। बस एक अनुरोध जरुर है कि यह भूमि या तो गरीबी की रेखाा से नीचे जीवन यापन करने वाले व्यक्तियों को घर की छत उपलब्ध कराने हेतु मकान बनाकर या छोटे प्लाट काट लघु उद्योग के लिए दी जाए और अगर बड़े लोगेां या उद्योगपितयों को अपार्टमेंट बनाने या उद्योग लगाने के लिए जमीन दी जाए तो उनसे बाजार भाव से जमीन का पैसा दिया जाए जिससे मिलने वाले पैसे से सरकार चुनावी घोषणाओं व गरीब व मध्यम वर्ग के लिए शुरु हुए कार्य पूरे हो सके। क्योंकि बड़े लोग उद्योग लगाने पर पैसा कमाएंगे। तो जमीन रियायती दरों पर क्यों।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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