जवाली, 02 फरवरी। पौंग झील में इस बार 115 प्रजातियों के एक लाख 24 हजार 344 प्रवासी पक्षियों की आमद रिकॉर्ड हुई है। बार हेडेड गीज प्रजाति के प्रवासी पक्षियों की आमद सबसे ज्यादा हुई है, जो कि 62293 है। इसके अलावा यूरेशियन कूट 12118, नॉर्थन पिनटेल 11928, कॉमन टील 7265, लिटल कर्माेरेंट 4544, कॉमन पोचार्ड 3522, ग्रेट कैस्टल ग्रेब 3322, ग्रे लैग गूज 3242 सहित अन्य प्रजातियों के पक्षी झील में पहुंचे हैं।
यह प्रवासी पक्षी नवंबर माह में पौंग झील में आते हैं और मार्च माह तक झील में रहते हैं। जैसे ही गर्मियों की आहट होती है, तो प्रवासी पक्षी कतारबद्ध तरीके से चहचहाते हुए अपने वतन वापस लौटने शुरू हो जाते हैं। प्रवासी पक्षियों के आने से झील गुलजार हो जाती है तथा जैसे ही प्रवासी पक्षी वापस लौट जाते हैं तो झील में बीरानी छा जाती है। रंगबिरंगे मनमोहक प्रवासी पक्षियों को देखने पर्यटक भी झील में आते हैं तथा इनको अपने कैमरों के कैद करके अपने देशों को ले जाते हैं। अफ्रीका, एशिया, इंग्लैंड, नाइजीरिया सहित अन्य देशों में जब झीलें बर्फ में तबदील हो जाती हैं तो यह पक्षी भारत की नदियों की तरफ रुख करते हैं। पौंग झील में सबसे ज्यादा पक्षी पहुंचते हैं जिनकी सुरक्षा का जिम्मा वन्य प्राणी विभाग को सौंपा गया है। इस बार वन्य प्राणी विभाग ने प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ी है। वन्य प्राणी विभाग के डीएफओ रेजीनॉड रॉयस्टोन ने कहा कि झील में आए प्रवासी पक्षियों की गणना की ही है, जो कि एक लाख 24 हजार 344 प्रवासी हैं। उन्होंने कहा कि पक्षियों की सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। उन्होंने कहा कि टीमें दिनरात इनकी सुरक्षा में जुटी हुई हैं तथा दूरबीन व ड्रोन से भी इन पर नजर रखी जा रही है।
Trending
- अंडर-19 विश्वकप जीतने के लिए वैभव सूर्यवंशी और टीम को बधाई
- डिजिटल ठगी में 25 हजार का मुआवजा ऊंट के मुंह में जीरा भी नहीं, रिजर्व बैंक के अफसर मुंह बंद करने की बजाय ठोस उपाय ढूंढे
- पीएम मोदी के गुरुमंत्र को आत्मसात करें छात्र, अंकों के पीछे ना भागकर खुद को जीवन की कसौटी पर कसें अभिभावक
- भारत का देसी एआई 22 भाषाओं में बोलेगा, इसी महीने आएगा टेक्स्ट वर्जन
- करीना कपूर एलओसी कारगिल फिल्म के सीन को याद कर भावुक हुईं
- प्रयागराज के IVF सेंटर पर सौदा, नाबालिग को शादीशुदा बताकर एग्स निकलवाने वाली 4 महिलाओं समेत 5 गिरफ्तार
- पेराई क्षमता बढ़ी बागपत चीनी मिल की
- बीड़ी के धुएं ने रोक दी मथुरा में ट्रेन

