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    Home»देश»मां भारती के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन व प्रणाम करते हैं
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    मां भारती के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन व प्रणाम करते हैं

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comFebruary 27, 2026No Comments11 Views
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    अगर आपके लहू में रोष नहीं है तो वह पानी है जो आपकी रगो में बह रहा है। ऐसी जवानी का क्या फायदा जो मातृभूमि के काम ना आए सिद्धांत को मानने वाले १४ साल की उम्र में असहयोग आंदोलन से जुड़कर जब गिरफ्तार हुए तो पिता का नाम पूछने पर आजादी और अपना नाम आजाद और पता जेल बताने वाले चंद्रशेखर आजाद को उस समय १५ कोड़ों की सजा मिली जो उनके द्वारा सहर्ष स्वीकार की गई और युवाओं को यह प्रेरणा दी कि अपने फैसले से वह देश के लिए आगे बढ़ें और आजादी को अपना उददेश्य बनाएं। बताते चलें कि छोटी उम्र में अंग्रेज अफसर को पत्थर मारने वाले चंद्रशेखर आजाद ने शुरुआती जीवन में यह संदेश दिया कि वो देश के लिए कुछ भी कर गुजरेंगे। उन्होंने क्रांतिकारी तरीकों से देश में गणतंत्र की स्थापना के लिए हिंदुस्तानी रिपब्लिकन आर्मी का गठन किया जिसका मतलब था क्रांतिकारी सेना। २७ फरवरी १९३१ को एक मुखबिर की सूचना पर ब्रिटिश पुलिस ने इलाहाबाद के अल्फ्रैड पार्क में उन्हें घेरकर गोलियो से भून दिया। वह अंतिम समय में भी बहादुरी का परिचय देते हुए विदा हुए। २३ जुलाई १९०६ को मध्यप्रदेश के भवरा गांव में जन्मे युवाओं की प्रेरणा के स्त्रोत चंद्रशेखर आजाद की आज हम पुण्यतिथि मना रहे हैं। हमें स्वतंत्र भारत में बोलने का अवसर उपलब्ध कराने वाले श्रेष्ठ वीरों में शुमार चंद्रशेखर आजाद की आज हम पुण्यतिथि मना रहे हैं। इस अवसर पर अपने निर्भीक नायक जिनकी देश की आजादी के लिए कुछ कर गुजरने की प्रतिबद्धता को प्रणाम करते हुए हमेशा देश के करोड़ों युवा उनके आदर्श और विचारों को आत्मसात कर दिल और दिमाग में राष्ट्रभक्ति की लौ जलाए रहेंगे। इस भावना के साथ ऐसे महानवीर को हम श्रद्धांजलि देते हुए नमन करते हैं।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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