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    भारतीय नियमों के आगे झुका मेटा? बाल शोषण और डीपफेक को माना गंभीर मुद्दा, सरकार बोली- US के कानून नहीं चलेंगे

    adminBy adminAugust 6, 2026No Comments1 Views
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    नई दिल्ली. भारत सरकार ने मेटा के खिलाफ अपनी निगरानी और सख्त कर दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के वरिष्ठ अधिकारियों ने कंपनी की वैश्विक टीम के साथ लगातार दूसरे दिन बैठक की। सरकार ने स्पष्ट कहा कि भारत में कोई भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अमेरिकी कानूनों के आधार पर नहीं चल सकता। उसे भारतीय कानूनों का पूरी तरह पालन करना होगा। बैठक में एआई, डीपफेक, बाल यौन शोषण सामग्री, कंटेंट मॉडरेशन और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी के साथ सरकार ने आईटी नियमों को और सख्त करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है।
    क्या सरकार ने मेटा से क्या कहा और जांच क्यों बढ़ाई?
    सरकारी अधिकारियों ने कहा कि भारत में काम करने वाले सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है कि वे समाज और कानून दोनों के प्रति जवाबदेह रहें। अधिकारियों के अनुसार तकनीकी मामलों को विस्तार से समझा जा रहा है और यह देखा जा रहा है कि मेटा के प्लेटफॉर्म भारतीय कानूनों का किस हद तक पालन कर रहे हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया कंपनियों के लिए अलग नियामक बनाने पर विचार नहीं किया जा रहा है। मौजूदा संवैधानिक और कानूनी व्यवस्था के तहत ही कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने मेटा से उसके एल्गोरिद्म, कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम, सुरक्षा उपायों और अनुपालन व्यवस्था से जुड़ी जानकारी भी मांगी।
    एआई और डीपफेक को लेकर सरकार क्या बदलाव चाहती है?
    बैठक के साथ ही सरकार ने आईटी नियमों में संशोधन का प्रस्ताव भी आगे बढ़ाया है। प्रस्ताव के अनुसार एआई से तैयार सभी सामग्री पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा, ताकि उपयोगकर्ता आसानी से पहचान सकें कि कंटेंट कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाया गया है। इसके अलावा यदि किसी गैरकानूनी एआई सामग्री को हटाने का सरकार या अदालत का वैध आदेश मिलता है तो उसे हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर केवल तीन घंटे करने का प्रस्ताव रखा गया है। डीपफेक, प्रतिरूपण और अन्य भ्रामक एआई सामग्री के खिलाफ भी तेज कार्रवाई की व्यवस्था की जा रही है।

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