

मेरठ, 13 जून (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। ऐतिहासिक उत्तरी भारत के प्रसिद्ध प्रांतीय मेला नौचंदी में शायद गत रात्रि को आयोजित ऐतिहासिक मुशयरे ऑल इंडिया में जितनी भीड़ श्रोताओं की इस वर्ष रही उतनी शायद किसी और आयोजन में नहीं रही। शहर विधायक जनाब रफीक अंसारी और वसीम बरेलवी की अध्यक्षता में शुरू हुए मुशायरे का शुभारंभ देश के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार सूचना आयुक्त श्री राजेन्द्र सिंह और शोभित यूनिवर्सिटी के कुंवर शेखर द्वारा दीप जलाकर की गयी। बताते चलें कि पूर्व में प्रदेश सरकार में मंत्री रहे डा. मेराजुद्दीन के द्वारा कराये जाने वाले मुशायरे की याद उस समय ताजा हो गयी जब दुनिया के जाने माने शायर नवाज देवबंदी, वसीम बरेलवी और पापुलर मेरठी आदि ने अपने अपने अलग अंदाज में शायरी सुनाई तो सभागार तालियों की गड़गड़ाहट और वाह जनाब वहा के शोर से गूंजता रहा। संयुक्त मेला नौचंदी और सेफ फाउंडेशन के संयुक्त रूप से डा. मेराजुद्दीन के पुत्र बदर महमूद और फैज महमूद तथा चौधरी यश पाल के प्रयासों से संपन्न हुए मुशायरे में जब शायरों ने कहा कि जो जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है, मैंने खुद को बड़ी मुश्किल से बचा रखा है हमको फिरदौस को पाने की कोई फिक्र नहीं है वह तो मां-बाप की खिदमत करके मिल जाएगी। नौचंदी मेले की रोशनी में नहाए पटेल मंडप में आयोजित शायरी के इस कार्यक्रम ने गत रात को यादगार बना दिया। देर रात तक चले कार्यक्रम में हर कोई इसके संयोजक बदर महमूद और फैज महमूद एवं यशपाल सिंह की प्रशंसा कर रहा था। मुशायरे में विशेष अतिथि के रूप में जाने माने अधिवक्ता अंतर्राष्ट्रीय ख्याती प्राप्त रोटेरियन गजेन्द्र सिंह धामा, एससी-एसटी आयोग यूपी के सदस्य श्री नरेन्द्र खजूरी, सीडीओ नूपुर गोयल, जिला पंचायत एकता पंडित, एएमए वीएस कुशवाह, बदर महमूद, प्रतीश सिंह, कर्मेंद्र सिंह, इमरान सिद्दीकी, फजल चौहान, नासिर सैफी आदि सहित भारी तादाद में श्रोता मौजूद रहे। जब हिमांशी बावरा ने अपनी प्रस्तुति दी तो हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा तथा डा. हरिओम पंवार की कविताओं पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजायी। खचाखच भरे सभागार में आयोजित सफल मुशायरे में बदर महमूद और फैज महमूद तथा चौधरी यश पाल सहित अनम शेरवानी, सोशल मीडिया एसोसिएशन के शक्ति सिंह एडवोकेट, सलमान मुईनेद्दीन, वसीम अहमद, भाजपा नेता अंकित चौधरी, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी कोमल सिंह, डा. सुनील शर्मा एडवोकेट, ठाकुर प्रतीश सिंह, शिक्षाविद् डा. कर्मेंद्र सिंह, तथा रालोद नेता प्रतीक जैन, मुरारी लाल केन आदि का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में मशकूर मामनून कन्नौजी, डा. हरिओम पंवार, अजहर इकबाल, हिमांशी बावरा, मोइनुद्दीन शादाब, अज्म शाकिरी, फुरकान सरधनवी, और हेमंत गौतम, आलोक अविरल, पॉपुलर मेरठी, नदीम शाद, चंदन राय, रियाज सागर आदि ने अपनी प्रस्तुति से शमां बांधा। मुशायरे का सफल संचालन शायर रियज सागर द्वारा किया गया।
मुशायरे में कई पुराने लोगोें का कहना था कि फैज व बदर महमूद के प्रयासों से आयोजित हुआ। मुशायरे ने उनके दादा राष्ट्रपति के चिकित्सक रहे पद्मश्री हकीम सैफुद्दीन अहमद और उनके पिता डा. मेराजुद्दीन द्वारा आयोजित कराये गये सफल आयोजनों में शुमार रहा।
डा. नवाज देवबंदी ने इंसानियत और हिंदू मुस्लिम एकता पर बल देते हुए शेर बहुत मजाक बनाते हो तुम गरीबों की, मदद तो करते हो तस्वीर खींच लेते हो । हिंदू मुस्लिम चाहे जो कहा लिखा हो माथे पर मगर, आपके सीने में हिंदुस्तान होना चाहिए। प्रो. वसीम बरेलवी ने पढ़ा मैंने खुद को बड़ी मुश्किल से बचा रखा है, वरना दुनिया तेरा हो जाने में क्या रखा है। उससे कहना जो कहे प्यार में क्या रखा है, सामने मीर का दीवान खुला रखा है । जाके लौटा है कहीं कोई हवा का झोंका, तुमने क्या सोचके दरवाजा खुला रखा है। डॉ. हरिओम ने मोहब्बत के रंग में पढ़ा मैं तेरे प्यार का मारा हुआ हूं सिकंदर हूं मगर हारा हुआ हूं। रियाज सागर ने भावुक अशआर से समा बांध दिया जिसको पाला था बड़े नाज से वो छोड़ गया बाप ने कैसी बुढ़ापे में सजा पाई है। मशकूर मामनून कन्नौजी ने वालिदैन की खिदमत की अहमियत पर कहा हमको फिरदौर को पाने की कोई फिक्र नहीं वो तो मिल जाएगी मां बाप की खिदमत करके। इकबाल अशहर ने अपने अंदाज ए बयां से खूब दाद बटोरी पढ़ा कि मैं नीचा हो गया अपनी नजर में मेरी आवाज ऊंची हो गई थी, मैं गुल्लक तोड़कर वापस गया तो वो गुड़िया और महंगी हो गई थी। चंदन राय, अजहर इकबाल, शायरा हिमांशी बबरा, मोईन शादाब, अज्म शाकिरी, फुरकान सरधनवी, डॉ. नदीम शाद, हेमंत गौतम ने कलाम से महफिल को यादगार बना दिया।
प्रस्तुतिः-अंकित बिश्नोई राष्ट्रीय महामंत्री सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए व पूर्व सदस्य मजीठिया बोर्ड यूपी संपादक पत्रकार

