प्रयागराज 07 मार्च। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि यदि किसी कर्मचारी की गलती के परिणामस्वरूप दूसरे कर्मचारी की मृत्यु होती है, तो इसके लिए राज्य को उत्तरदायी माना जाएगा। कर्मचारी कभी-कभी खतरनाक कर्तव्यों का पालन इस विश्वास के साथ करते हैं कि राज्य उनके श्जीवनश् के लिए जिम्मेदार होगा। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थनंदन की खंडपीठ ने सोनभद्र निवासी सरिता देवी की याचिका स्वीकार कर ली है। याची के पति की मृत्यु करंट लगने के बाद पोल से गिरकर हुई थी। शट डाउन नहीं लिए जाने से यह हादसा हुआ था। याची को 10.16 लाख रुपये मुआवजा मिला था। इसे अपर्याप्त बताते हुए 60 लाख रुपये मुआवजे की मांग की गई।
याची के पति विनोद कुमार जोशी सीनियर तकनीशियन (इलेक्ट्रिकल) थे और सीनियर सेक्शन इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) ईस्ट सेंट्रल रेलवे रेनुकूट के अधीन नियुक्त थे । आठ अप्रैल 2023 को सुबह लगभग 7.30 बजे रेनुकूट मुख्य कालोनी में बिजली कटौती की सूचना मिली। उन्हें सुबह फाल्ट ठीक करने के लिए निर्देशित किया गया। सहयोगी विनोद सिंह के साथ पेट्रोलिंग के दौरान उन्होंने पावर हाउस के पास जले फ्यूज की पहचान की। दस्ताने और हेलमेट के साथ खंभे पर चढ़ने लगे। सहयोगी ने नीचे सीढ़ी सुरक्षित की करंट लगने से विनोद जोशी लगभग 9.45 बजे खंभे से गिर गए। हिण्डालको अस्पताल ले जाए जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। एफआइआर दर्ज करवा कर पोस्टमार्टम करवाया गया। याची के अनुसार सुनवाई का कोई अवसर प्रदान किए बिना संबंधित प्राधिकरण ने 10,16,700 रुपये मुआवजा निर्धारित किया लेकिन संबंधित कारकों को ध्यान में नहीं रखा। शव परीक्षण रिपोर्ट से स्पष्ट है कि विभागीय कर्मचारियों ने लापरवाही बरती, क्योंकि 11 केवी एचटी लाइन का शटडाउन नहीं लिया गया, जिसके परिणामस्वरूप मृत्यु हुई, इसलिए राज्य उत्तरदायी है।
रिव्यू अर्जी का उद्देश्य नए सिरे से मामले में विचार करना नहीं
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि रिव्यू अर्जी का उद्देश्य नए सिरे से मामले में विचार करना नहीं, बल्कि पूर्व निर्णय में हुई कानूनी गलती को सुधारना है। न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की एकलपीठ ने इस टिप्पणी के साथ ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथारिटी (जी एनआइडीए) की वह समीक्षा याचिका खारिज कर दी है, जो मेसर्स एलिवेटर प्रापर्टीज प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में निर्णय के खिलाफ दाखिल की गई थी। कोर्ट ने कहा, पूर्व आदेश में स्पष्ट था कि मेसर्स एलिवेटर प्रापर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को 31 दिसंबर 2022 से तीन महीने पहले नोटिस जारी करना आवश्यक था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यह कानूनी बाध्यता थी। इसलिए प्राधिकरण व राज्य सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया था।

