नई दिल्ली, 18 जून (ता)। कृष्ण भगवान के चौंसठ महत्वपूर्ण गुण हैं, और उनके भक्त को उनके बारे में सुनकर दिव्य आनंद प्राप्त होता है। श्रील रूप गोस्वामी द्वारा रचित भक्ति-रसामृत-सिंधु में वर्णित विशेषताओं का विवरण इस प्रकार है रू 1. उसका शरीर सुगठित है, 2. उसके शरीर में सभी शुभ लक्षण हैं, 3. उसका शरीर सुंदर है, 4. उसका शरीर अत्यंत तेजस्वी है, 5. उसका शरीर अत्यंत बलवान है, 6. वह हमेशा सोलह वर्ष के लडक़े जैसा दिखता है, 7. वह विभिन्न भाषाओं में पारंगत है, 8. वह सत्यवादी है, 9. वह मधुर शब्दों से सुशोभित है, 10. वह बोलने में निपुण है, 11. वे बहुत विद्वान हैं, 12. वे बहुत बुद्धिमान हैं, 13. वे प्रभावशाली हैं, 14. वे आनंदित हैं, 15. वे धूर्त हैं, 16. वे कुशल हैं, 17. वे कृतज्ञ हैं, 18. वे दृढ़ विश्वास वाले हैं. 19. वे विभिन्न परिस्थितियों से निपटना जानते हैं, 20. वे शास्त्रों के निर्देशों से हमेशा अवगत रहते हैं, 21. वे स्वच्छ हैं, 22. वे अपने भक्तों द्वारा नियंत्रित हैं, 23. वे स्थिर हैं, 24. वे आत्म-संयमित हैं, 25. वे क्षमाशील हैं, 26. वे गंभीर हैं, 27. वे चिंतनशील हैं, 28. वे अपने व्यवहार में निष्पक्ष हैं, 29. वे उदार हैं, 30. वे धार्मिक हैं. 31. वे एक महान नायक हैं, 32. वे दयालु हैं, 33. वे आदरणीय हैं, 34. वे सक्षम हैं, 35. वे सौम्य हैं, 36. वे विनम्र हैं, 37. वे अपने समक्ष शरणागत आत्माओं के रक्षक हैं, 38. वे मुक्तिदाता हैं, 39. वे भक्तों के मित्र हैं, 40. वे प्रेम के प्रति विनम्र हैं, 41. वे सर्व-शुभ हैं, 42. वे सबसे शक्तिशाली हैं, 43. वे प्रसिद्ध हैं, 44. वे सभी जीवों के प्रति समर्पित हैं, 45. वे सभी के द्वारा पूजनीय हैं, 46. वे सभी स्त्रियों को अत्यंत आकर्षित करते हैं, 47. वे अपने भक्तों के प्रति पक्षपाती हैं, 48. वे समस्त ऐश्वर्य से परिपूर्ण हैं, 49. वे सर्वाेच्च नियंत्रक हैं, 50. वे समस्त सम्मान के स्वामी हैं, 51. वे सदा अपनी मूल अवस्था में स्थित रहते हैं, 52. वे सर्वज्ञ हैं, 53. वे सदा हरे-भरे या सदा ताजे रहते हैं, 54. वे शाश्वत आनंदमय हैं, 55. वे सर्वज्ञ और समस्त पूर्णता के स्वामी हैं, 56. उनके पास अकल्पनीय गुण हैं, 57. वे असंख्य ब्रह्मांडों को धारण करने में सक्षम हैं, 58. वे सभी अवतारों के बीज हैं, 59. वे उन शत्रुओं को सर्वाेच्च पूर्णता प्रदान करते हैं जिन्हें वह मारते हैं, 60. वह आत्म-साक्षात्कार प्राप्त व्यक्तियों में सबसे आकर्षक हैं। कृष्ण के चार विशेष गुण हैं, जो इस प्रकार हैं रू 61. वे अद्भुत लीलाएं प्रकट करने में सक्षम हैं, 62. वह पारलौकिक बांसुरी वादन में निपुण हैं, 63. वह प्रेममय भक्तों से घिरे हुए हैं और 64. वह अद्वितीय व्यक्तिगत सौंदर्य से संपन्न हैं।
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