पत्रकारिता के जनक नारद मुनि और पूर्व में गणेश शंकर विद्यार्थी आदि प्रेरणास्त्रोत पुरोधाओं ने कभी सोचा नहीं होगा कि इस क्षेत्र के लोग चोरी और चेन लूटने के आरोप में पकड़े जाएंगे। उन्होंने मिशनरी पत्रकारिता की शुरुआत की मगर आज इस लाइन में आने वाला पहले दिन से साम दाम दंड भेद से बड़ा धनवान बनने और धन संपदा जुटाने की कोशिश में लग जाता है। वर्तमान समय में मिशनरी पत्रकारिता तो संभव नहीं है क्योंकि समाज ही कुछ ऐसा हो गया है कि उसमें ईमानदारी से अपना काम करने में कोई सफल नहीं है। कई कारणों से क्योंकि सरकार भी बड़े समाचार पत्रों को मालामाल और नामचीन पत्रकारों को सुविधासंपन्न बनाने में प्रयासरत रहती है। यही कारण है कि लघु भाषाई समाचार पत्र संचालको व पत्रकारों की आर्थिक स्थिति कमजोर रहती है और इन्हें प्रताड़ित करने का प्रयास किया जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि हम चोरी धोखाधड़ी करने लगे। अगर इससे पेट नहीं भरता तो दूसरे काम से आप जुड़ सकते हैं या प्रतिष्ठित प्रकाशनों से जुड़कर समाचारों का प्रकाशन कर अपनी व्यवस्था बनाए रखते हैं। हम अपने आप को बहुत बड़ी ताकत समझते हैं लेकिन ऐसे कारणों से हमारी प्रतिष्ठा और सम्मान कम हुआ है। यह बड़े ताज्जुब की बात है कि पत्रकारों के बारे में ऐसी शर्मनाक खबरें पढ़ने को मिलती है अपने शहर में इनकी संख्या ज्यादा नजर आती है। एक दो माह में कोई ऐसी घटना जरुर होती है तो इस पेशे को क लंकित करती है। मेरा मानना है जो पत्रकार इस पेशे से जुड़े हैं सबको एकजुट होकर तथाकथित होकर पत्रकारों जो ऐसी घटना को अंजाम देते हैं उनके खिलाफ ठोस निर्णय लेना चाहिए क्योंकि ऐसे तथाकथितों की संख्या बढ़ती जाएगी और हमारा सम्मान घटता जाएगा। मैं कभी नहीं कहता पत्रकारों को सही लाभ नहीं उठाने चाहिए लेकिन सभ्य नागरिकों को चोट पहुंचाना ना सही कह सकते ।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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