देहरादून, 22 जून (ता)। विश्व हिंदू परिषद की सबसे बड़ी चिंता हिंदुओं की जनसंख्या को लेकर है। विहिप ने संकल्प लिया है कि संगठन हिंदुओं को जगाने का अभियान चलाएगा। हिंदू समाज में अब एक बच्चे का चलन छोड़कर दो से तीन बच्चे होने चाहिए। विश्व हिंदू परिषद ने इस विषय को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है।
हरिद्वार में विश्व हिन्दू परिषद की केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में इस पर संत समाज ने निर्णय लिया है। अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महासचिव दंडी स्वामी जितेंद्रानन्द सरस्वती ने हिंदुओं में घटती प्रजनन दर और जनसांख्यिकीय बदलावों पर चिंता जताई। कहा कि विहिप का चिंतन केवल मंदिर, तीर्थ और धार्मिक प्रतीकों तक सीमित नहीं। वह समाज की संरचना, परिवार की अवधारणा और भविष्य के भारत की जनसंख्या तस्वीर तक अपना विस्तार कर रहा है।
राम मंदिर आंदोलन के बाद हिंदुत्व की राजनीति के सामने स्वाभाविक प्रश्न था कि आगे का मार्ग क्या होगा। ऐसे में विहिप ने तय किया कि अब समाज की मूल इकाइयों को पुनर्परिभाषित करने की जरूरत है। परिवार, विवाह, जनसंख्या व सांस्कृतिक एकता को नए विमर्श का केंद्र बनाया जाएगा। संत समाज ने कहा कि हिंदुओं की कई जाति-वर्गों में प्रजनन दर 1.5 प्रतिशत से नीचे जा चुकी है। यह चिंता का विषय है। इसके सामाजिक दुष्प्रभाव पर भी मंथन किया गया। संतों ने चर्च और मिशनरी गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई। सीमावर्ती राज्यों, विशेषकर पश्चिम बंगाल जैसे क्षेत्रों में धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियां बढ़ाने की बात भी की गई।
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