प्रयागराज 16 मार्च। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करते वक्त हर मामले में भारी-भरकम धनराशि का सिक्योरिटी बॉन्ड जमा करने की शर्त उचित नहीं है। उत्तराधिकारी मृतक का प्राकृतिक वारिस है और किसी अन्य पक्ष को इस पर आपत्ति नहीं है तो ऐसी कठोर शर्तों से छूट दी जा सकती है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकल पीठ ने कानपुर नगर की अलका सिंघानिया की याचिका पर ट्रायल कोर्ट के सिक्योरिटी बॉन्ड की शर्त में छूट दे दी। शकुंतला देवी की मृत्यु के बाद उनकी बेटी अलका ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। ट्रायल कोर्ट ने प्रमाण पत्र देने का आदेश तो दिया पर उतनी ही राशि का सिक्योरिटी और पर्सनल बॉन्ड जमा करने की शर्त लगा दी। इसको याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची का कहना था कि जब दूसरी कानूनी वारिस (उनकी बहन) को कोई आपत्ति नहीं है। कोई अन्य दावेदार भी सामने नहीं आया है तो ऐसी सुरक्षा राशि जमा करने का निर्देश तर्कहीन है। हाईकोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के अरविंद नंदा बनाम राज्य मामले का हवाला देते हुए याची को सिक्योरिटी बॉन्ड जमा करने से छूट दे दी। साथ ही ट्रायल कोर्ट को आठ सप्ताह में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया है।
सिर्फ सिविल सूट लंबित होने के आधार पर नहीं खारिज की जा सकती प्रोबेट याचिका : कोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ सिविल सूट (मूल बाद) लंबित होने के आधार पर प्रोबेट याचिका खारिज नहीं की जा सकती। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने जिला जज के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें उन्होंने वसीयत की वैधता को चुनौती देने वाले एक अलग दीवानी मुकदमे के कारण प्रोबेट याचिका को सुनने से इन्कार कर दिया था। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने अमित गुप्ता व अन्य की प्रथम अपील पर दिया है। फिरोजाबाद के अपीलकर्ताओं ने इंद्र प्रकाश गुप्ता की ओर से 31 मार्च 2022 को निष्पादित एक पंजीकृत वसीयत के आधार पर जिला न्यायालय में प्रोबेट याचिका दायर की थी। इस बीच विपक्षी ने फर्जी बता उसे रद्द करने और संपत्ति के बंटवारे के लिए सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के समक्ष एक मूल बाद दायर कर दिया। जिला जज ने 21 जुलाई 2025 को आदेश में कहा कि वसीयत का मुद्दा पहले से ही सिविल कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए प्रोबेट नहीं दी जा सकती। इस फैसले को याचियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। प्रोबेट याचिका वसीयत प्रमाणित करने के लिए कोर्ट में दायर की जाती है।

