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    Home»देश»सरकार और निर्माणकर्ता असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को दे मुआवजा लेकिन एफआईआर उचित नहीं
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    सरकार और निर्माणकर्ता असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को दे मुआवजा लेकिन एफआईआर उचित नहीं

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comApril 9, 2026No Comments6 Views
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    पुताई करते हुए नीचे गिरने से मजदूर की हुई मौत, मकान स्वामी पर दर्ज हुआ मुकदमा असंगठित क्षेत्रों के मजदूरों पर पहले ही कम समस्याएं नहीं है। आठ घंटे की मेहनत के बाद भी सही खानपान की सुविधा नहीं मिल पाती। कभी काम मिलता है कभी नहीं। मजदूरी के स्थान से घर तक आने जाने में दो घंटे लगते है। इससे कह सकते हैं कि १२ घंटे में इतना ही मिलता है जितना पेट भर खाने को मिल जाए। असंगठित क्षेत्र के मजजूरों के लिए सरकार कुछ आर्थिक सहायता दे जिससे उसके परिवार में खाना ना मिलने की नौबत ना आ पाए।
    लेकिन ३५ वर्षीय मनीष की नीचे गिरने से मौत हुई परिवार के लिए इससे बड़ा दुख कुछ नहीं हो सकता। जीवनभर उसकी याद में मां बाप और परिवार को तड़पना पड़ेगा यह भी सत्य है। यह भी सही है कि हादसा होने पर मकान मालिकों को जेल भेजा जाने लगा तो भूखमरी और काम ना मिलने का जो माहौल होगा उससे कई समस्याएं खड़ी हो सकती है क्योंकि निर्माणकर्ता जानबूझकर किसी भी कर्मचारी को नुकसान नहीं पहु़ंचाना चाहता। इससे तो उसे ही परेशानियेां का सामना करना पड़ेगा। कई जगह ठेकेदारों के आदमी काम करते हैं। जिनका मकान मालिकों से कोई मतलब नहीं होता। वो ठेकेदार से भुगतान लेते हैं और उसके निर्देशन में काम करते हैं। कुछ लोगों के इस कथन से मैं भी सहमत हूं कि ऐसे नियम बनाए जाए जिससे घर या दुकान बनाने वाले के खिलाफ एफआईआर ना हो और ऐसी घटनाओं में सरकार एकमुश्त रकम पीड़ित परिवार को दे और कुछ मुआवजा मकान मालिक से दिलाया जाए जिससे दोनों परिवार चलते रहें। क्योंकि एफआईआर होने लगी तो काम मिलना ही मुश्किल हो जाएगा और केंद्र व प्रदेश सरकार हर आदमी को काम नहीं दिला सकती। इसलिए जनहित में मजदूर के परिवार के लिए कुछ किया जाए और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को किसी भी स्थिति में भूखा मरने के लिए ना छोड़ा जाए और ना ऐसी नौबत आनी दी जाए।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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