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    Home»देश»सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को सरकार दुकानें बनाकर देने के साथ दे आर्थिक मदद, दोषी अफसरों को भी भेजा जाए जेल, एक व्यक्ति को दी जाए नौकरी, बाजार बंद ने स्पष्ट किया कि हर कोई व्यापारी के साथ है
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    सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को सरकार दुकानें बनाकर देने के साथ दे आर्थिक मदद, दोषी अफसरों को भी भेजा जाए जेल, एक व्यक्ति को दी जाए नौकरी, बाजार बंद ने स्पष्ट किया कि हर कोई व्यापारी के साथ है

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comApril 9, 2026No Comments26 Views
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    शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में रिहायशी भूमि पर बने कॉमर्शियल भवनों पर की जा रही कार्रवाई के दौरान ४४ भवनों पर सील लगा दी गई। बताते हैं कि इस दौरान व्यापारियों का ३५०० करोड़ का घाटा हुआ। अब यहां आने वाले ग्राहकों को कुछ दिन सूनेपन का सामना करना पड़ेगा। इसके आसपास स्थित मंडपों में भी अब शहनाई नहीं गूंजेंगी और बैंकों में काम अस्पतालों में इलाज नहीं होगा। इस कार्रवाई को लेकर व्यापारियों में उबाल है और सपा कांग्रेस व अन्य राजनीतिक दल भी व्यापारियों के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं। सपा के सरधना विधायक अतुल प्रधान निरंतर व्यापारियों के हित व सरकार से इस बारे में नियम बनाने की मांग कर रहे हैं। संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता फरमा रहे हैं कि ऐई साहब आपसे भी लिया जाएगा हिसाब तो दुकानदार कह रहे हैं कि पैसा लेने वाले भी अब कार्रवाई कर रहे हैं। इन्हें भी कार्रवाई से बख्शा नहीं जाएगा। दूसरी तरफ जो स्कूल संचालक हैं वो सील लगाने के विरोध में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। स्थिति यह हो गई है कि व्यापारी एक दूसरे से मारपीट भी कर रहे हैं। व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष किशोर वाधवा को वर्तमान अध्यक्ष द्वारा थप्पड़ मार दिया गया। व्यापारियों के साथ सारा शहर एकजुट है इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि आज सुबह से ही सचल दस्ते बाजारों में घूमना शुरु हो गए थे तो मुख्य बाजार से लेकर गली मोहल्लों की दुकानें बंद नजर आई। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता स्वतंत्र पत्रकार डॉ संजय गुप्ता के अनुसार बंद ऐतिहासिक है और ऐसा कुछ ही मौकों पर हो पाया है। बताया जा रहा है कि शहीन बाग का मुकदमा लड़ने वाले अधिवक्ता संजय हेगड़े स्कूल संचालकों का मामला देख रहे हैं और कोर्ट में वह पैरवी करेंगे। जब गत दिवस सील की कार्रवाई हो रही थी तो दूसरी तरफ बिजली विभाग कनेक्शन काट रहा था। व्यापारियों पर तो एक प्रकार से यह ऐसी मार पड़ी है जो कई सालों तक उन्हें उबरने नहीं देगी। अगर पीड़ित की हाय लगती है वाली बात सही है तो इन निर्माणों के लिए जिम्मेदार आवास विकास के वर्तमान व सेवानिवृत अधिकारियों पर भी हाय लगना और प्रकोप पड़ना अनिवार्य कहा जा सकता है। स्थिति का अंदाजा इससे लगा सकते हैँ कि व्यापारी अपनी गुटबंदी छोड़ एक हो गए और नागरिक भी व्यापारियों के साथ एकजुट होकर खड़े नजर आ रहे हैं। कुल मिलाकर जितना देखने को मिल रहा है भाजपा नेता और जनप्रतिनिधि व कार्यकर्ता सक्रिय तो दिखाई दिए। कुछ ने सीएम से गुहार भी लगाई तो कई केंद्रीय मंत्रियों तक भी पहुंचे। लेकिन क्योंकि वो सत्ताधारी दल के हैं इसलिए इस कार्रवाई के दौरान वह दिखाई नहीं दिए। परिणामस्वरूप एक समय में सेंट्रल मार्केट की रौनक छिन गई। भविष्य में इनके द्वारा क्या किया जाएगा और आवास विकास के अफसर क्या करेंगे यह तो अभी नहीं कहा जा सकता। मगर यह जरुरी है कि इन व्यापारियों के साथ सही नहीं हुआ।
    मेरा मानना है कि
    १ यूपी सरकार ऐसे मामलों में निर्माण नीति के विपरीत भवन ना बनने दे लेकिन इन व्यापारियों को राहत दिलाने के लिए नियमों में बदलाव कर इनकी रोजी रोटी बनाने की कार्रवाई शुरु करे।
    २ जब यह दुकानें बनी तब से लेकर आज तक आवास विकास में तैनात रहे अफसरों को ढूंढकर व्यापारियों के नुकसान का उनकी व्यक्तिगत संपत्ति से वसूली कर दिया जाए मुआवजा।
    ३ इस रिहायशी भूमि पर कॉमर्शियिल निर्माण के लिए आवास विकास के अधिकारी भी दोषी है। आवास विकास इन व्यापारियों को सर्वे कराकर मुआवजा दे जो कम से कम एक करोड़ रुपये जरुर हो।
    ४ शमन शुल्क के नाम पर जमा कराया गया पैसा व्यापारियों को वापस दिया जाए।
    ५ जिस प्रकार बेरोजगारों को सरकार द्वारा दुकानें बनाकर दी जाती है उसी नीति के तहत शास्त्रीनगर के व्यापारियों को भी उचित स्थान पर बाजार बनाकर दुकानें दी जाएं और वो सभी सुविधा दी जाए जिससे वहां तक उपभोक्ता की पहुंच हो सके।
    कहने का मतलब है कि गरीबों पर सितम और धनवानों पर रहम की नीति सही नहीं कही जा सकती। मैं नागरिकों की बात से सहमत हूं कि सेंट्रल मार्केट के जिन दोषी अधिकारियों की सूची बनाई थी उन्हें ढूंढकर जिस प्रकार से तुरंत दुकानों पर सील लगाई गई है उसी प्रकार उन अफसरों को भी जेल भेजा जाए। क्योंकि आज जिस प्रकार से सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के प्रति आम आदमी ने एकजुटता दिखाई है अगर सरकार ने निर्णय नहीं लिया जो २०२७ के चुनाव में जैसा सपा सोच रही है वैसा ही हो सकता है। ऐसा हुआ तो सत्ताधारी दल के उम्मीदवारों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। ऐसा ना हो इसके लिए सरकार जिस प्रकार अन्य वर्गो को नुकसान की भरपाई करती है उसी के समान उजाड़े जा रहे व्यापारियों के परिवारों को आर्थिक सहायता और हर परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाए।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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