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    Home»देश»दुष्कर्म पीड़िता को 27 सप्ताह के गर्भ को गिराने की दी अनुमति
    देश

    दुष्कर्म पीड़िता को 27 सप्ताह के गर्भ को गिराने की दी अनुमति

    adminBy adminMay 25, 2026No Comments4 Views
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    जोधपुर, 25 मई (ता)। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने 16 साल की नाबालिग रेप पीड़ित के अबॉर्शन की अनुमति दी है। पीड़ित 27 सप्ताह 4 दिन (करीब 7 महीने) की प्रेग्नेंट है। जस्टिस मुकेश राजपुरोहित की एकल पीठ ने 22 मई को यह फैसला सुनाया।
    कोर्ट के आदेश के बाद जोधपुर कलेक्टर आलोक रंजन ने 22 मई को सीएमएचओ को नोडल अधिकारी नियुक्त किया और इसी दिन पीड़ित को सिरोही से जोधपुर शिफ्ट करने के लिए एम्बुलेंस भेजी।
    पीड़ित के दादा ने 18 मई को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सिरोही जिले की रहने वाली नाबालिग के साथ हुए रेप और पॉक्सो के तहत मामला दर्ज किया गया था। 27 सप्ताह 4 दिन (करीब सात महीने) का गर्भ होने के बाद घरवालों को जानकारी हुई।
    याचिका दायर होने पर कोर्ट ने पहले सिरोही और फिर डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज जोधपुर में 18 मई को मेडिकल बोर्ड का गठन करवाया। मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि पीड़ित को गंभीर एनीमिया है। गर्भ 7 महीने का है। इसकी वजह से खतरा ज्यादा है। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टर्स की निगरानी में अबॉर्शन करना ठीक रहेगा।
    याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट सपना वैष्णव ने पैरवी की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए तर्क दिया। उन्हांेंने कहा कि यह गर्भावस्था रेप का परिणाम है। एक नाबालिग को इस अनचाहे गर्भ को धारण करने के लिए मजबूर करना उसके अधिकारों का हनन है।
    सुनवाई के दौरान जब नाबालिग पीड़ित से पूछा गया, तो उसने भी खुद अदालत के सामने अबॉर्शन की इच्छा जताई। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता के सहयोगी एडवोकेट शेर सिंह राठौड़ उपस्थित हुए।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए एस.एन. मेडिकल कॉलेज जोधपुर से संबद्ध ‘हॉस्पिटल’ को सुरक्षित गर्भपात कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने आदेश दिया कि इस पूरी प्रक्रिया में पीड़ित के इलाज, दवा, यात्रा और परिवार के रुकने व खाने-पीने का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। भविष्य की कानूनी कार्रवाई के लिए भ्रूण के डीएनए और फॉरेंसिक साक्ष्य सुरक्षित रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।
    जोधपुर कलेक्टर आलोक रंजन ने 22 मई को जोधपुर सीएमएचओ को नोडल अधिकारी नियुक्त किया। इस केस पर सारा खर्च मेडिकल रिलीफ सोसायटी से होगा। इसके अलावा हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामलों में गर्भावस्था जांच और मेडिकल प्रक्रिया में जान-बूझकर देरी पर चिंता जताई।

    Court Order Desh jodhpur Rape Victim Granted Permission to Abort 27-Week Pregnancy tazza khabar tazza khabar in hindi
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