प्रयागराज 28 जुलाई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई पुरुष अपनी पहली शादी की बात छिपाकर धोखे से दूसरी शादी करता है तो वह कानून का फायदा उठाकर महिला को भरण-पोषण देने से मना नहीं कर सकता. न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद ने मथुरा फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल दो अलग-अलग आपराधिक पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है.
मामले के अनुसार, मोनिका उर्फ सत्यवती का विवाह 12 दिसंबर 2016 को राजस्व विभाग में लेखपाल के पद पर कार्यरत मनोज कुमार उर्फ बबलू के साथ हुआ था. बाद में महिला को पता चला कि मनोज की पहली शादी (वर्ष 2008 में) पहले से कायम थी, जिसका आपसी सहमति से तलाक 15 नवंबर 2017 को हुआ था. यानी महिला से दूसरी शादी के वक्त पति का पहला विवाह कानूनी रूप से समाप्त नहीं हुआ था. इसके बाद पीड़ित पत्नी ने धारा 125 के तहत भरण-पोषण की मांग की थी.
फैमिली कोर्ट, मथुरा ने महिला को 6,000 रुपये प्रति माह भरण-पोषण देने का आदेश दिया था. इस आदेश के खिलाफ पति मनोज कुमार ने याचिका दाखिल कर तर्क दिया कि पहली शादी के रहते दूसरी शादी कानूनी रूप से अमान्य है, इसलिए धारा 125 के तहत उसकी पत्नी भरण-पोषण की हकदार नहीं है.
वहीं दूसरी ओर पत्नी ने याचिका दाखिल कर कहा कि पति एक सरकारी कर्मचारी है और लगभग 50,000 रुपये प्रति माह कमाता है. इसलिए 6,000 रुपये की राशि बहुत कम है.
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों (बादशाह बनाम सौ. उर्मिला बादशाह गोडसे और अन्य) का हवाला दिया. अदालत ने कहा कि जिस महिला को शादी के समय पति के पहले विवाह के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और जिसे धोखे में रखकर शादी की गई, उसे धारा 125 के तहत ‘पत्नी’ मानकर भरण-पोषण का अधिकार मिलेगा. कोई भी व्यक्ति अपने ही गलत आचरण का लाभ उठाकर महिला को बेसहारा नहीं छोड़ सकता.
हाईकोर्ट ने पति मनोज कुमार की याचिका को खारिज करते हुए पत्नी की याचिका आंशिक रूप से स्वीकार कर ली और भरण-पोषण की राशि में बढ़ोतरी कर दी.

