प्रयागराज 04 जुलाई। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अमरोहा के सैदनगली थाने में दर्ज उस प्राथमिकी को रद करने से इन्कार कर दिया है, जिसमें हलाला की आड़ में नाबालिग से दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म के आरोप हैं। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने तैयब सहित पांच आरोपितों की चार याचिकाओं को एक साथ सुन कर सभी को खारिज कर दिया। कोर्ट ने इसे गंभीर अपराध बताया।
पीड़िता का निकाह 25 अप्रैल 2015 को अजहर नवाज नामक व्यक्ति से जबरन कराया गया था। तब उसकी उम्र 15 वर्ष थी। निकाह बाद मारपीट का सिलसिला शुरू हुआ और जनवरी 2016 में अजहर ने तीन तलाक दे दिया। कुछ महीनों बाद वह दोबारा शादी का प्रस्ताव लेकर आया, लेकिन इसके लिए नवंबर 2016 में पीड़िता को हलाला निकाह से गुजरना पड़ा, जो मौलाना कय्यूम के साथ बुलंदशहर के सियाना कस्बे में कराया गया।
आरोप है कि इस दौरान पीड़िता से जबरन शारीरिक संबंध बनाए गए। अप्रैल 2017 में अजहर के साथ दूसरा निकाह हुआ और 2018 में बेटी का जन्म हुआ। इसके बाद अजहर का व्यवहार फिर बिगड़ा। जनवरी 2021 में उसने दूसरी बार तीन तलाक दे दिया। इद्दत के दौरान ही एक अन्य महिला से शादी कर ली। बाद में बेटी की कस्टडी और भरण-पोषण के बहाने अजहर दोबारा पीड़िता के संपर्क में आया। इस बार कहा गया कि चूंकि दो बार तलाक हुआ है, इसलिए दो बार हलाला करना होगा। आरोप है। कि 19 फरवरी 2025 को हलाला के नाम पर सह-अभियुक्त शाहनवाज चौधरी और हकीम निशात ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया।
पीड़िता के बयान के बाद जांच अधिकारी ने तैयब सहित छह अन्य सह अभियुक्तों को जोड़ा। भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के साथ पाक्सो अधिनियम की धाराएं भी लगाई गईं। अब कुल नौ आरोपित हैं।
हाई कोर्ट का निर्णय सच्चाई की जीतः पीड़िता
हाई कोर्ट के इस फैसले को पीड़िता ने सच्चाई की जीत बताया और कहा कि उसे न्याय व्यवस्था पर भरोसा है। पीड़िता के अनुसार, यह मामला 2015 में शुरू हुआ, जब स्वजन ने निकाह करा दिया। इसके बाद उसे लगातार प्रताड़ना दी गई और फिर दो बार तीन तलाक देकर हलाला कराया गया। पीड़िता का आरोप है कि मुकदमा वापस लेने के लिए उस पर लगातार दबाव बनाया गया, यहां तक कि फोन पर बेटी की आवाज सुनाकर धमकिया दी गई।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कानून में पर्सनल ला की आड़ लेकर अपराध से बचा नहीं जा सकता। पहले हलाला के समय पीड़िता नाबालिग थी, इसलिए वह प्रथम दृष्टया पाक्सो अधिनियम के तहत अपराध है, जबकि दूसरा हलाला (फरवरी 2025) सामूहिक दुष्कर्म का मामला प्रतीत होता है।

