नई दिल्ली 24 मार्च। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से पैदा हुए संकट से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। उन्होंने संघर्ष के कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर लोकसभा में वक्तव्य देते हुए यह भी कहा कि इस संकट का प्रभाव लंबे समय तक रहने वाला है और इसका सामना कोरोना संकट की तरह करना होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार संवेदनशील है, सतर्क है और हर सहायता के लिए तत्पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समस्या का समाधान कूटनीति और बातचीत से ही संभव है। भारत तनाव को कम करने व संघर्ष समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा। यह आवश्यक है कि भारत की संसद से इस संकट पर एकमत और एकजुट संदेश पूरी दुनिया में जाए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस समय पश्चिमी एशिया की हालत चिंताजनक है। इस संकट को तीन सप्ताह से ज्यादा हो रहा है। इसका पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर, लोगों के जीवन पर, बहुत ही विपरीत असर हो रहा, इसलिए पूरी दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह भी कर रही। भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। यह चुनौतियां आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी और मानवीय भी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तटीय सुरक्षा, सीमा सुरक्षा, को और मजबूत किया जा रहा है।
मोदी ने कहा, इस संकट का प्रभाव लंबे समय तक रहने वाला है और इसका सामना देशवासियों को कोरोना संकट की तरह ही करना होगा। मोदी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई बहुत ज्यादा प्रभावित न हो। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ तत्व ऐसे संकट में गलत फायदा उठाने का प्रयास करते हैं, इसलिए कानून व्यवस्था से जुड़ी सभी एजेंसियों को सतर्क रखा गया है। राज्य सरकारों से कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश में किसानों ने अन्न भंडार भर रखे हैं। हमारे पास पर्याप्त खाद्यान्न हैं। प्रयास है कि खरीफ मौसम की सही से बुवाई हो। वह देश के किसानों को विश्वास दिलाते हैं कि सरकार उनकी हरसंभव मदद करती रहेगी। गर्मियों में बिजली आपूर्ति चुनौती रहेगी। फिलहाल सभी बिजली संयंत्रों पर पर्याप्त कोयला भंडार है। युद्ध का भारत पर कम से कम दुष्प्रभाव हो, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
भारत में और अन्य प्रभावित देशों में 24/7 कंट्रोल रूम और आपातकालीन हेल्पलाइन स्थापित की गई है। इनके माध्यम से सभी प्रभावितों को त्वरित जानकारी दी जा रही है। अब तक तीन लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से ही अभी तक लगभग 1000 भारतीय सुरक्षित वापस लौटे हैं। इनमें 700 से अधिक मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवा हैं। खाड़ी देशों में सीबीएसई ने सभी भारतीय स्कूलों में होने वाले कक्षा दसवीं और बारहवीं की निर्धारित परीक्षाओं को रद्द कर दिया है।

