अगर आपका मन निष्क्रिय है तो कोई समस्या नहीं होती ऐसा इंसान जो कुछ सोचता ही नहीं तो उसे कठिनाई कैसे होगी। क्योंकि उसके किसी मुददे को लेकर भी उत्तेजित होने का चांस ही नहीं होता। मगर कहते हैं कि एक व्यक्ति मृत प्राय समान होते हैं जिनकी कोई सोच समझ नहीं होती। वर्तमान में हमें अगर व्यवस्था के साथ चलना है तो सक्रिय होना और मन चेतन होना जरुरी है। जानकारों के अनुसार हमारा मन भी कई प्रकार की व्यवस्थाओं को आत्मसात करके रखता है। शुरूआती दौर में अगर यह निष्क्रिय है तो इसे संभालकर पूर्ण सक्रिय बनाकर पारिवारिक माहौल खुश बना सकता है और जिस क्षेत्र में आप है तो वहां आपका सम्मान होगा। मन चेतन होने से सोच ऊर्जावान होगी और जब ऐसा होता है तो सबकुछ अच्छा ही होता है।
कभी कभी प्रफुल्ल चेतन मन के स्वामी किसी से बात करते हैं तो उसमें रचनात्मक सोच अच्छे शब्द का उपयोग होता है। कई लोग तो इसे अच्छा मानते हैं और तारीफ करते हैं। कुछ लोग इसे नकार कर टाल देते हैं। एक वर्ग ऐसा भ्ीा होता है जिसमें अहंकारी और नकारात्मक सोच वालों का शुमार होता है और जब कोई उनकी प्रशंसा करता है तो वो जवाब देते हैं कि इतनी चाटुकारिता क्यों करते हों। ऐसा कहने वाले शायद यह भूल जाते हैं कि घटिया सोच रखने वाले कमीन व्यक्ति में भी एक अच्छाई जरुर होती है और अगर उस व्यक्ति या समाजहित में उस अच्छाई को उभारा जाए तो वह चाटुकारिता या चापलूसी नहीं होती। जिंदा आदमी में लोग कितनी कमियां निकालते हो लेकिन मरने के बाद हर आलोचक को उसमें अच्छी बातें दिखाई देने लगती है। एक गांव में दो भाई थे और दोनों दूसरों को कष्ट पहुचाने और सामने वाले का नुकसान कराने का कोई मौका नहीं चूकते थे। जब एक भाई मरा तो उसके बारे में अच्छी बात क्या कहें। एक बुजुर्ग ने कहा कि इसने बुराईयों की भले ही सीमा तोड़ी हो लेकिन कुछ से फिर भी अच्छा था। जब दूसरे का निधन हुआ तो वो पहले वाले से भी ज्यादा घटिया था। एक बुजुर्ग ने कहा कि अपने भाई से तो अच्छा था। कहने का मतलब है कि हम सकारात्मक सोच वाले होते हैं इसलिए माहौल को तनावमुक्त बनाने के लिए खराब माहौल में भी कुछ अच्छा बोलकर उसे सामान्य बनाने के लिए प्रयास करते हैं। कहने का मतलब है कि कोई चाटुकार या चापलूस नहीं होता। कई प्रकार से कमजोर समझे जाने वाले लोग सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए अच्छी बातें करते हैँ जिसे लोग कमजोर समझकर चापलूस समझकर उसकी आलोचना करने से नहीं चूकते। समाज में कई कारणों से बढ़ते तनाव और समस्याओं से जूझ रहे लोगों को स्वस्थ रखने के लिए जरुरी है कि अच्छी समयानुकल बाते करने वालों को चाटुकार ना समझकर उनका सम्मान करते हुए बढ़ावा देने में सबको महत्वपूर्ण निभानी चाहिए वरना कठिनाइयां जीवन को नरक बनाने से पीछे नहीं रहेंगी। सबके बारे में अचछा कहो अच्छा सोचो की नीति अपनाकर प्रगृति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। तनाव में रहकर निगेटिव सोच वालों को यह समझना चाहिए कि वह अपनी सोच से खुद का ही नुकसान कर रहे हैं किसी और का नहीं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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