दिवाली हो या दशहरा ईद हो या मोहर्रम शिवरात्रि सभी के समान होली पर भी सफाई के लिए जिम्मेदारों द्वारा बड़े बड़े दावे और प्रचार प्रसार खूब किया गया मगर होली से लेकर अब तक जितना शहर में देखने को मिला कुछ वीआईपी इलाकों और प्रमुख सड़कों को छोड़ दें तो ज्यादातर गलियों में कूड़े के ढेर से उठती बदबू सड़ती नाली नालियों में भरी गंदगी से आम आदमी का वहां से होकर निकलना संभव नहीं था। यहां रहनेे वालों का क्या हाल होगा यह कोई भी अंदाजा लगा सकता है।
स्पष्टवादी मुखरराजनेता व सबसे ज्यादा काम कराने वाले नेताओं में शुमार डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी द्वारा नगर निगम के अधिकारियों से यह कहने के बावजूद कि जिमखाना में होने वाले होली मिलन पर साफ सफाई दुरुस्त की जाए, जिमखाना में जहां होली मिलन हो रहा था वहां सफाई नहीं थी लेकिन आसपास के रास्तों और क्षेत्रों में गंदगी फैलाता कूड़ा और दुर्गध से भरी नालियां यह बता रही थी कि अफसर किस प्रकार की सफाई करा रहे हैं। आश्चर्य इस बात का है कि वीआईपी इलाकों में घंटो में सफाई कराने व क्षेत्र को चमकाने वाले अफसर जिमखाना होली मिलन के संस्थापक स्वतंत्रता सेनानी पंडित गौरीशंकर की प्रतिमा के आसपास भी सफाई उस प्रकार से नहीं करा पाए जैसा वीआईपी इलाकों में कराई जाती है।
यह हाल तब है जब पीएम मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की भावनाओं से जुड़ा अभियान स्वच्छता है। उसके बाद भी ऐसा हाल क्यों। मेरा मानना है कि सफाई के लिए जो बजट विभागों को दिया जाता है। उसका ऑडिट जमीनी आधार पर किया जाए क्योंकि आंकड़बाजी में फंसाकर जो पैसे की बंदरबाट चल रही है उसका हाल यह है कि स्कूली बच्चों से लेकर नेताओं तक की मदद और करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी नगर निगम स्मार्ट सिटी का दर्जा प्राप्त नहीं कर पाए वो भी तब जब केंद्र व प्रदेश सरकार से संबंध पार्टी के पार्षद और महापौर ऐसे संस्थानों में हैं। ऐसा क्यों हो रहा है यह तो उन्हें देखना है लेकिन या तो जनता को शेखचिल्ली के सपने दिखाना बंद हो या दावों के अनुसार व्यवस्था करके दिखाया करें। क्योंकि उनकी थोड़ी सी लालसा के चलते आम आदमी के सपने टूटते हैं तो स्थिति कष्टदायक होती है। गर्मी का मौसम आ रहा है। इसमें गंदगी बढ़ने से उत्पन्न मच्छरों द्वारा बीमारियां पैदा होती हैं। मुझे लगता है कि सीएम को पार्टी के जनप्रतिनिधियों को सक्रिय कर जिम्मेदारों की लगाम कसनी चाहिए वरना हर व्यक्ति को चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत सरकार के सारे सपने फेल भले ना कर पाए लेकिन अफसरों का प्रयास ऐसा ही बना रहेगा।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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