नई दिल्ली/मेरठ, 21 मई (ता)। उत्तर प्रदेश के बांदा में भीषण गर्मी के बीच तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है. लू चल रही है। सड़कों पर सन्नाटा है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. उत्तर प्रदेश का बांदा हर गर्मी में चर्चा में आ जाता है।
वजह एक ही होती है तेज गर्मी। कई बार यहां तापमान 46, 47, 48 डिग्री सेल्सियस या उससे भी ऊपर पहुंच जाता है। लोग कहते हैं कि बांदा भट्टी बन गया। यह केवल बोलने की बात नहीं है। वाकई बन जाता है। इसके पीछे साफ वैज्ञानिक कारण हैं।
इसकी भौगोलिक स्थिति, हवा, मिट्टी, नमी, पेड़पौधे और बदलती जलवायु, सब मिलकर इस इलाके को बेहद गर्म बना देते हैं। आइए समझते हैं कि आखिर हर साल बांदा हर साल इतना गर्म क्यों हो जाता है?
बांदा बुंदेलखंड क्षेत्र में आता है। यह इलाका पहले से ही गर्म और शुष्क माना जाता है। यहां गर्मियों में सूरज की किरणें बहुत तेज पड़ती हैं। जमीन जल्दी तपती है। हवा में नमी कम रहती है। बादल कम बनते हैं। ऊपर से पानी की कमी और हरियाली में गिरावट हालात को और कठिन बना देती है। इसी वजह से बांदा में गर्मी केवल महसूस नहीं होती, बल्कि कई बार खतरनाक स्तर तक पहुंच जाती है।
बांदा की सबसे बड़ी पहचान उसकी भौगोलिक स्थिति है। यह बुंदेलखंड के उस हिस्से में स्थित है जहां गर्मियों का स्वभाव पहले से ही कठोर है। पहाड़ी या घने वन भी इतने नहीं हैं कि तापमान को संतुलित कर सकें। इसलिए जमीन और हवा दोनों तेजी से गर्म होते हैं. समुद्र के पास वाले इलाकों में तापमान कुछ हद तक नियंत्रित रहता है. वहां नमी अधिक होती है. हवा में ठंडक भी कुछ रहती है। लेकिन बांदा जैसे अंदरूनी भूभाग में ऐसा नहीं होता।
जनपद में लगातार बढ़ रहे पारे के कहर से निपटने के लिए प्रशासन भी चौकन्ना है। बांदा के अपर जिलाधिकारी कुमार धर्मेन्द्र ने कहा कि पिछले दो-तीन दिनों से लगातार तापमान बढ़ है। जिसको देखते हुए प्रतिदिन एडवाइजरी जारी की जा रही है कि तरह से हम हीटवेव की स्थिति में अपने को सुरक्षित रख सकते हैं, सभी सरकारी भवनों को कूलिंग प्वाइंट में कन्वर्ट कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त सभी अस्पतालों सीईएससी, पीएससी में भी कूलिंग सेंटर बनाये गए हैं।
इसके साथ ही जनता को हिदायत दी गई है कि जरूरी काम न हो तो 12 से 4 बजे तक बाहर न निकलें। विशेष परिस्थितियों में अगर निकलना भी पड़े तो सिर को ढक ही निकले और पानी की बोतल साथ मे रखें। इसके अतिरिक्त किस तरह के लक्षणों के दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करना है। इसको लेकर जागरूकता के साथ निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही प्रमुख मार्गाे और चौराहों पर भी तीन सेट लगाकर कूलर और पानी की व्यवस्था कराई जा रही है।
उधर, मेरठ जनपद में लगातार बढ़ती गर्मी और लू की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वाेपरि रखते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत सभी बोर्डों के विद्यालयों में प्री-नर्सरी से लेकर कक्षा 10 तक के छात्रों के लिए 21 से 23 मई 2026 तक अवकाश घोषित किया गया है। जनपद में तापमान लगातार बढ़ रहा है और लू का प्रभाव भी तेज हो गया है। इस विषम परिस्थिति में बच्चों की सेहत पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को रोकने के लिए प्रशासन ने यह कदम उठाया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए और इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन को भी इस दिशा में सक्रिय रहने को कहा है।
जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने इस संबंध में जारी अपने आदेश में कहा है कि इस गर्मी और हीटवेव के दौरान बच्चों का विद्यालय आना उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए यह तीन दिवसीय अवकाश बच्चों को इस प्रकोप से बचाने के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि विद्यालय प्रबंधन इस आदेश का अक्षरशः पालन करे और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
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