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    Home»देश»दुष्कर्म से हुई गर्भावस्था के मामले में गर्भपात कराने की नहीं होनी चाहिए समय सीमा : सुप्रीम कोर्ट
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    दुष्कर्म से हुई गर्भावस्था के मामले में गर्भपात कराने की नहीं होनी चाहिए समय सीमा : सुप्रीम कोर्ट

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comMay 1, 2026No Comments4 Views
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    नई दिल्ली, 01 मई (ता)। सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर महिला की प्रजनन स्वायत्ता और इच्छा को महत्व देने पर जोर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि किसी नाबालिग बच्ची को गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने अजन्मे बच्चे को नुकसान होने की दलील पर नाबालिग की गर्भावस्था जारी रखने की एम्स की मांग ठुकराते हुए कहा कि यह नाबालिग से दुष्कर्म का मामला है। पीड़िता को जिंदगी भर इस घटना का जख्म और आघात झेलना पड़ेगा।
    कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा वह कानून में संशोधन करने पर विचार करे ताकि दुष्कर्म से हुई गर्भावस्था के मामले में 20 सप्ताह बाद भी गर्भ समाप्त कराया जा सके उसमें कोई समय सीमा लागू न हो। कानून को लचीला और बदलते समय के साथ तालमेल बिठाने वाला होना चाहिए। साथ ही कानून में ऐसा बदलाव भी करें कि ऐसे मुकदमे एक सप्ताह के अंदर पूरे हो जाएं। आखिर उस बच्ची को मुकदमे के दौरान होने वाले मानसिक तनाव को भी क्यों झेलना पड़े। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जोयमाल्या बाग्ची की पीठ ने नाबालिग के 30 सप्ताह के गर्भ को नष्ट करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ एम्स के क्यूरोटिव याचिका दाखिल करने पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि मेडिकल प्रोफेशनल्स के विशेष ज्ञान का सिद्धांत लोगों की इच्छा पर हावी नहीं हो सकता। डॉक्टर मरीजों के लिए फैसले नहीं ले सकते। यहां तक कि जजों को भी तय प्रक्रिया के अनुसार ही काम करना होता है।
    कोर्ट ने कहा कि निर्णय लेना नागरिक का अधिकार है। एम्स उसकी जगह निर्णय नहीं ले सकता। हमें व्यक्ति की इच्छा का सम्मान करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह भ्रूण बनाम बच्ची की लड़ाई है। आप अजन्मे बच्चे की बात कर रहे हैं लेकिन उस उस बच्ची की ओर नहीं देख रहे जिसने इतना दर्द सहा है। बच्ची का हर हाल में गरिमामय जीवन होना चाहिए। आप उसके परिवार के बारे में सोचिए।
    कोर्ट ने नाबालिग बच्ची के बारे में भावुक टिप्पणी करते हुए कहा कि यह चाइल्ड रेप का मामला है। वो अभी खुद बच्ची है उसे मां बनने पर मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि अगर उसे गर्भपात की इजाजत नहीं दी गई तो, उस पीड़िता को जिंदगी भर के लिए गहरा जख्म और मानसिक आघात झेलना पड़ेगा।
    कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगर मां को कोई स्थाई विकलांगता का खतरा नहीं है तो गर्भपात करवा देना चाहिए। किसी पर भी अनचाहा गर्भ थोपा नहीं जा सकता। पीठ ने कहा जरा सोचिए वह अभी बच्ची है उसे अभी आगे पढ़ाई करना चाहिए लेकिन हम उसे मां बनाने पर तुले हैं। उसके दर्द के बारे में सोचना चाहिए जो उसने झेला है।

    Court Order Desh New Delhi No Time Limit Should Apply to Abortion in Cases of Pregnancy Resulting from Rape: Supreme Court tazza khabar tazza khabar in hindi
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