लखनऊ, 05 फरवरी। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पटरी के दुकानदारों के हित में अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 के तहत जब तक टाउन वेंडिंग कमेटी शहर का सर्वेक्षण पूरा नहीं कर लेती व इस संबंध में स्ट्रीट वेंडिंग सर्टिफिकेट जारी नहीं कर देती, तब तक किसी भी वर्तमान पटरी की दुकान को न हटाया जाए। बशर्ते वे यातायात के सुचारू रूप से चलने में बाधा न बन रहे हों। कोर्ट ने मामले को तीन माह पश्चात सूचीबद्ध करने के आदेश दिए हैं, साथ ही इस दौरान नगर निगम, लखनऊ को वेंडिंग प्लान बनाने को कहा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति एके कुमार चौधरी की खंडपीठ ने अमीनाबाद के पटरी दुकानदारों अमर कुमार सोनकर व अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया। कोर्ट ने कहा कि जब तक विधि अनुसार सर्वेक्षण पूरा नहीं हो जाता, राज्य सरकार द्वारा वेंडिंग योजना को स्वीकृति नहीं मिल जाती तथा सभी पात्र पटरी दुकानदारों को वेंडिंग प्रमाणपत्र जारी नहीं हो जाते, तब तक धारा 3(3) के तहत ऐसे दुकानदारों को वैधानिक संरक्षण प्राप्त रहेगा।
कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि याचियों समेत सभी मौजूदा स्ट्रीट वेंडरों के साथ स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के प्रावधानों के अनुसार ही व्यवहार किया जाएगा। याचियों का कहना था कि सर्वेक्षण पूरा हो गया है लेकिन अब तक सर्टिफिकेट नहीं जारी किया गया। वहीं नगर निगम ने स्वीकार किया कि वेंडिंग प्लान तैयार तो किया गया है, लेकिन उसे अब तक राज्य सरकार की स्वीकृति नहीं मिली है। इस पर न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार की मंजूरी के बिना वेंडिंग प्लान कानून की नजर में अस्तित्वहीन है। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि अधिनियम के तहत आवश्यक योजना, सर्वे और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पिछले 11 वर्षों से लंबित है।
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