Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • फरीदाबाद के 70 प्राइवेट स्कूल ब्लैकलिस्ट, अब नहीं होंगे दाखिले, मान्यता के खेल में फंसा छात्रों का भविष्य
    • छोटा परिवार ही खुशियों की आधार पूंजी
    • 1 करोड़ से अधिक गणना प्रपत्रों का मात्र 16 दिनों में एसआईआर के तहत डिजिटलीकरण
    • टीम इंडिया की हार पर श्रेयस अय्यर-गौतम गंभीर की होगी रिव्यू मीटिंग
    • छात्रों को विदेश में पढ़ाने भेजने वाले कॉलेज व यूनिवर्सिटी दे पूरी जानकारी, क्या पता उनका स्टेटस क्या है
    • ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने पर उठा ऐतराज, अब जिला पंचायत अध्यक्ष प्रशासक बनाए गए आखिर समय से चुनाव कराने में क्या परेशानी है
    • मंडलायुक्त और डीएम दें ध्यान! कोचिंग सेंटरों के संचालकों से शपथ पत्र लेकर मेडा द्वारा सील खोलने की चर्चा जनहित में नहीं, नागरिक इसे लखनऊ और दिल्ली जैसी घटनाओं को आमंत्रण देना ठहरा रहे हैं
    • भगवान श्रीकृष्ण के अवतार ‘जगन्नाथ’ की रथयात्रा का पुण्य सौ यज्ञों के बराबर
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»जंगल से मिली ‘मोगली गर्ल’ एहसास ने 18 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
    देश

    जंगल से मिली ‘मोगली गर्ल’ एहसास ने 18 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

    adminBy adminJune 20, 2026No Comments7 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    बहराइच 20 जून। बहराइच के कतरनियाघाट वन्य जीव अभ्यारण्य के घने जंगल में 20 जनवरी 2017 में एक 10 साल की लड़की बंदरों के झुंड के साथ पहली बार मिली थी. डरी सहमी यह लड़की इंसानों को देखकर सहम जाती थी. मानव समाज से अनजान इस लड़की के न तो परिवार के बारे में किसी को पता था और न ही किसी रिस्तेदार के बारे में. इस लड़की को नाम दिया गया था मोगली गर्ल. इसे जंगल की बेटी यानी वन दुर्गा की भी उपाधि मिली थी. पूरे देश का ध्यान खींचने वाली इस बच्ची को इलाज के लिए लखनऊ के डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था, वहां चले लंबे इलाज के बाद आखिरकार 15 जून को इस बेटी ने दुनिया से अंतिम विदाई ले ली. उसकी मौत फेफड़ों की बीमारी के चलते हुई थी. वह भारत की पहली मोगली गर्ल भी कही जाती थी.

    बता दें कि बहराइच के कतरनियाघाट वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में घने जंगलों वाली मोतीपुर रेंज से गुजरने वाली एक सड़क पर 2017 में एक लड़की बंदरों के झुंड के बीच मिली थी. मानव समाज से वह पूरी तरह से अनजान थी. वह कपड़े पहनने से डरती थी और लोगों को भी सामने देखकर घबरा जाती थी. वह जानवरों की तरह ही दोनों हाथ और दोनों पैरों के बल पर चलती थी. उसके परिवार के बारे में किसी को कुछ भी नहीं पता था. वह भी स्पष्ट रूप से बोल नहीं पाती थी. यह वजह है कि उसको मोगली गर्ल की उपाधि दी गई थी. यह नहीं स्थानीय लोग उसे वनदुर्गा के नाम से बुलाते थे.
    बहराइच की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने ‘मोगली गर्ल’ का नाम पूजा रखा था. उसे मोहन रोड स्थित निर्वाण राजकीय बाल गृह विशेषीकृत में पहली बार ले जाया गया था. वहां उसका नाम बदलकर ‘एहसास’ रख दिया गया था.

    बहराइच के जिला अस्पताल में शुरुआती इलाज के बाद एहसास को अप्रैल 2017 में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर डीके सिंह द्वारा दो कर्मियों रेनू और माया को देखभाल के लिए तैनात किया गया था. रेनू और माया रोजाना बालिका के कपड़े से लेकर खाने तक देखरेख करती थी और हमेशा ही उसके साथ बनी रहती थी. धीरे-धीरे वह सही होने लगी। इस दौरान उसे सभी ने मोगली गर्ल कहना शुरू कर दिया। जिससे वह पूरे देश में मशहूर हुई और लोग देखने आने लगे.

    तत्कालीन डीएम अजय दीप सिंह को हुई तो उन्होंने अस्पताल जाकर मोगली गर्ल का हाल जानते हुए उसे नया नाम दिया था. उन्होंने नवरात्र के चलते मोगली गर्ल का नाम वन दुर्गा दिया. तत्कालीन मातृत्व व बल कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी मोगली गर्ल की जानकारी जैसे ही लगी तो उन्होंने तत्काल उसे बेहतर इलाज व अन्य सुविधाओं के लिए लखनऊ स्थित निर्वाण राजकीय बाल गृह भेजा. बीते 9 वर्ष रहने के बाद निर्वाण में रहने के बाद अचानक 15 जून को उसकी तबीयत अचानक खराब हो गई जिसे डॉक्टर राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान में भर्ती कराया गया जहां पर इलाज के दौरान उसकी सांसे थम गई.

    bahraich INDIA FIRST MOWGLI GIRL tazza khabar tazza khabar in hindi uttar-pradesh news
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    फरीदाबाद के 70 प्राइवेट स्कूल ब्लैकलिस्ट, अब नहीं होंगे दाखिले, मान्यता के खेल में फंसा छात्रों का भविष्य

    July 11, 2026

    छोटा परिवार ही खुशियों की आधार पूंजी

    July 11, 2026

    1 करोड़ से अधिक गणना प्रपत्रों का मात्र 16 दिनों में एसआईआर के तहत डिजिटलीकरण

    July 11, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.