मेरठ 11 जुलाई (प्र)। लखनऊ अग्निकांड के बाद सुरक्षा मानकों में कमी मिलने पर सील किए गए कोचिंग सेंटरों को मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने सशर्त राहत दी है। अब संचालक दो महीने के भीतर सभी निर्धारित मानक पूरे करने का शपथपत्र देकर अपने संस्थान दोबारा खोल सकेंगे। मेडा उपाध्यक्ष संजय मीणा ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी किया। आदेश जारी होने के कुछ ही घंटों में दो कोचिंग संचालकों ने शपथपत्र भी जमा कर दिया।
लखनऊ और दिल्ली में हुए अग्निकांड के बाद प्रदेशभर में सुरक्षा मानकों की जांच तेज कर दी गई थी। मेरठ में भी मेडा ने भवन, फायर सेफ्टी और अन्य आवश्यक मानकों का पालन न करने वाले कोचिंग सेंटरों व लाइब्रेरी के खिलाफ सीलिंग अभियान चलाया था।
शहर में करीब 50 कोचिंग सेंटर सील किए गए, जबकि 80 से अधिक संस्थानों को नोटिस जारी किए गए। इस कार्रवाई का कोचिंग संचालकों ने लगातार विरोध किया। संचालकों ने जिलाधिकारी, कमिश्नर और मेडा कार्यालय पहुंचकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। छात्रों ने भी पढ़ाई प्रभावित होने की बात कहते हुए कार्रवाई पर नाराजगी जताई।
इसी बीच शुक्रवार को मेडा उपाध्यक्ष संजय मीणा ने अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में छात्रों के भविष्य और उनकी पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए सशर्त राहत देने का निर्णय लिया गया। निर्णय के तहत जो कोचिंग संचालक दो महीने के भीतर सभी निर्धारित मानकों को पूरा करने का शपथपत्र मेडा कार्यालय में देंगे, उन्हें अपने संस्थान संचालित करने की अनुमति दी जाएगी।
हालांकि निर्धारित समय के भीतर मानक पूरे नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ दोबारा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मेरठ से पहले गाजियाबाद विकास प्राधिकरण भी इसी तरह की राहत कोचिंग संचालकों को दे चुका है। अधिकारियों का कहना है कि उद्देश्य संस्थानों को बंद कराना नहीं, बल्कि उन्हें पूरी तरह सुरक्षित बनाना है, ताकि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो।
इन शर्तों के साथ मिलेगी अनुमति
संस्थान में छात्रों के लिए पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ वातावरण और सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी।
पढ़ाने वाले शिक्षकों की योग्यता और अनुभव निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए, ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा सके।
छात्रों की सुरक्षा के लिए इमरजेंसी एग्जिट, अग्निशमन यंत्र सहित सभी आवश्यक सुरक्षा इंतजाम कराने होंगे।
शिक्षा विभाग की अनुमति, भवन का स्वीकृत मानचित्र और फायर विभाग की एनओसी अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होगी।

