नई दिल्ली, 12 जनवरी। डिजिटल संपत्ति बाजार में मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकी वित्तपोषण और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए भारत सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज के लिए नियमों को और सख्त कर दिया है। अब क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर खाता खोलने के लिए लाइव सेल्फी, जियो टैगिंग और उन्नत पहचान सत्यापन अनिवार्य होगा।
इसके तहत क्रिप्टो एक्सचेंजों को अब ‘आभासी डिजिटल संपत्ति’ सेवा प्रदाता के रूप में वर्गीकृत किया गया है। पहले जहां केवल दस्तावेज अपलोड कर केवाईसी पूरी हो जाती थी, अब एक्सचेंजों को उपयोगकर्ताओं की पहचान के लिए गहन जांच प्रक्रिया अपनानी होगी।
नए नियमों के अनुसार, क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर अकाउंट खोलने के लिए अब ‘लाइव सेल्फी’ अनिवार्य कर दी गई है। इसमें ऐसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल होगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि व्यक्ति वास्तव में सामने मौजूद है। यूजर को पलक झपकाने या सिर हिलाने जैसे निर्देश दिए जाएंगे, ताकि यह पुष्टि हो सके कि फोटो नकली या डीपफेक नहीं है। इस कदम का मकसद फर्जी पहचान और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर रोक लगाना है, जो क्रिप्टो सेक्टर में तेजी से बढ़ रही थी।
एफआईयू के दिशा-निर्देशों में जियो-टैगिंग को भी अनिवार्य किया गया है। अकाउंट बनाते समय यूजर की जगह (अक्षांश और देशांतर), तारीख, समय और इस्तेमाल किए गए आईपी एड्रेस का सटीक रिकॉर्ड रखना होगा। इसके अलावा बैंक खाते की सक्रियता और स्वामित्व साबित करने के लिए एक रुपये का लेनदेन जरूरी किया गया है। पहचान सत्यापन के लिए पैन कार्ड के साथ आधार, पासपोर्ट या वोटर आईडी जैसे दूसरे वैध पहचान पत्र देना होगा। ईमेल और मोबाइल नंबर का ओटीपी वेरिफिकेशन भी अब अनिवार्य है।
वित्त मंत्रालय के अधीन काम करने वाली फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट ने नए एंटी मनी लॉन्ड्रिंगऔर केवाईसी दिशानिर्देश जारी किए हैं। आठ जनवरी को जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, क्रिप्टो एक्सचेंज को केवल दस्तावेज अपलोड के आधार पर ग्राहकों को जोड़ने की अनुमति नहीं होगी। नए नियमों के तहत, उपयोगकर्ताओं को खाता बनाते समय एक लाइव सेल्फी लेनी होगी, जिसमें आंख झपकाने या सिर हिलाने जैसे संकेतों के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आवेदन करने वाला व्यक्ति वास्तविक है और किसी स्थिर तस्वीर या डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया है।
क्रिप्टो एक्सचेंजों को उच्च जोखिम वाले ग्राहकों का केवाईसी हर छह महीने में और अन्य ग्राहकों का साल में एक बार अपडेट करना होगा। साथ ही, सभी ग्राहकों के रिकॉर्ड और लेनदेन का डेटा कम से कम पांच साल तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
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