मेरठ 22 मई (प्र)। कपसाड़ कांड में पारस सोम की उम्र को लेकर शुरू हुआ विवाद सुलझने के बजाय उलझता जा रहा है। गुरुवार को जुवेनाइल कोर्ट (जेजे कोर्ट) में मेडिकल परीक्षण की सीलबंद रिपोर्ट खोली गई। इसमें डाक्टरों ने पारस की उम्र लगभग 19 साल बताई। दोनों पक्षों ने रिपोर्ट को अपने पक्ष में बताया। इस पर सुनीता पक्ष ने अब पारस सोम की मनोविज्ञानी जांच की मांग की ताकि उसकी उम्र का सही आंकलन हो सके। न्यायालय ने दोनों पक्षों की बहस सुनने फैसला सुरक्षित रख लिया। 27 मई को जेजे कोर्ट फैसला सुनाएगी।
सरधना थाना क्षेत्र में ग्राम कपसाड़ में आठ जनवरी को सुनीता की हत्या कर उसकी बेटी रूबी का पारस सोम ने अपहरण कर लिया था। इससे गांव में तनाव का माहौल बन गया था। वादी पक्ष के अधिवक्ता राजेन्द्र कुमार ने कहा कि वह पहले से ही कह रहे हैं। कि पारस बालिग है। उन्होंने जेजे बोर्ड में एक और प्रार्थना पत्र देकर आरोपी की उम्र का सही आंकलन करने को मनोवैज्ञानिक टेस्ट कराने की मांग की। उधर, पारस के अधिवक्ता बलराम सिंह ने कहा कि मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट केवल उम्र से जुड़ी रेंज बताता है। इसे पूरी तरह सही नहीं कहा जा सकता है। अगर उम्र 19 आई है तो बालक 17 या साढ़े 17 वर्ष का भी हो सकता है। पारस के बालिग होने के बाद यह टेस्ट हुआ है।
आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर 29 मई को सुनवाई
आरोपी के वकील का कहना है कि उन्होंने जिला न्यायालय में अपील दायर कर किशोर न्याय बोर्ड के मेडिकल परीक्षण के आदेश को चुनौती दी है। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 के तहत यदि विद्यालय से संबंधित मान्य प्रमाणपत्र उपलब्ध हो तो मेडिकल परीक्षण कराना अनिवार्य नहीं होता। इस अपील पर जिला न्यायालय में 29 मई को सुनवाई निर्धारित की गई है। वारदात के बाद परिजनों ने आरोपी के नावालिग होने का दावा किया था। इसके समर्थन में उन्होंने हाईस्कूल की अंकतालिका भी प्रस्तुत की थी। इसके बाद न्यायालय ने आरोपी की आयु तब करने के लिए मामला किशोर न्याय बोर्ड को भेज दिया था। किशोर न्याय बोर्ड में सुनवाई के दौरान आरोपी के विद्यालय के शिक्षक समेत अन्य संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं। कक्षा एक से चार तक का आरोपी का शैक्षणिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण बोर्ड ने 11 मई को आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराने का आदेश दिया था। इसके बाद आरोपी को बाल सुधार गृह से जिला अस्पताल लाकर उसका परीक्षण कराया गया। डॉक्टरों के पैनल ने उसका मेडिकल परीक्षण कर रिपोर्ट किशोर न्याय बोर्ड में पेश की थी। यह रिपोर्ट बृहस्पतिवार को किशोर न्याय बोर्ड में खोली गई। इसके मुताबिक आरोपी की आयु लगभग 19 वर्ष बताई गई है। अभियोजन पक्ष के वकील ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आरोपी ने संगीन अपराध किया है। मेडिकल रिपोर्ट में भी उसके बालिग होने की पुष्टि हुई है। उस पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जाना चाहिए। वहीं, आरोपी पक्ष के वकील ने कहा कि हाईस्कूल की मार्कशीट के आधार पर आरोपी नाबालिग है। वारदात भी आरोपी के मेडिकल परीक्षण कराने से चार महीने पहले हुई है। मेडिकल रिपोर्ट में आयु का सटीक आकलन नहीं होता। ऐसे में मेडिकल रिपोर्ट मायने नहीं रखती। उन्होंने उसे नाबालिग मानकर मुकदमा चलाने के लिए कहा। किशोर न्याय बोर्ड ने जिरह सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। 27 मई को आरोपी की आयु पर फैसला सुनाया जाएगा।

