लगता है कि समाजवादी पार्टी में शीघ्र ही नए और युवा नेतृत्व का उदय हो सकता है। आज तक समाजवादी पार्टी के मुखिया पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा कभी भी अपने बच्चों को राजनीतिक सरगर्मियों में चर्चाओं नहीं आने दिया लेकिन उनके बेटे अर्जुन यादव और पुत्री टीना यादव द्वारा रविवार को वाराणसी में धार्मिक दर्शन और पूजा-पाठ के साथ ही देश प्रदेश की सुख समृद्धि की की गयी कामना और कार्यकर्ताओं को उनके आने का पता चलते ही जुटी भारी भीड़ से यह एहसास होता है कि उत्तर प्रदेश के सबसे मजबूत राजनीतिक रूप से यादव परिवार के समर्थक और प्रशंसक चाहते है कि अखिलेश यादव व डिम्पल यादव के बच्चे भी राजनीति में आये और नई सोच के साथ एक नया नेतृत्व यूपी को दें राजनीतिक रूप से। बताते हैं कि दोनों ने समाजवादी पार्टी के पूर्व महानगर अध्यक्ष विष्णु शर्मा विश्वकर्मा के साथ वाराणसी पहुंचकर सबसे पहले काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किये। भीड़ जुटने की खबर जैसे ही पुलिस को मिली तो उनकी सुरक्षा के लिए उन्हें अपने घेरे में ले लिया और ऐसे ही उन्होंने संकट मोचन मंदिर में पहुंचकर दर्शन किये दोनों ही राजनीतिक परिवार के बच्चों ने मीडिया से कोई बात नहीं की तथा इस दौरों को गुपचुप रखने का भरपूर प्रयास किया।
बताते चले कि सपा अध्यक्ष की पुत्री टीना यादव का नाम तो एक दो बार सुनने को मिला लेकिन उनके पुत्र अर्जुन यादव पहली बार समाचारों की सुर्खियों में आये हैं इस धार्मिक दौरे को वैसे तो कोई नाम नहीं दिया जा सकता मगर राजनेता और उनके परिवार का व्यक्ति कहीं सार्वजनिक रूप से आता जाता है तो वह खबर बनना लाजमी है बताते चलें कि श्री मुलायम सिंह यादव पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा अपने कार्यकाल में यूपी चुनाव में सहयोगियों के साथ बहुमत प्राप्त कर जब अखिलेश यादव जी को यूपी का मुख्यमंत्री बनाया गया था तब वह भी चर्चित नहीं थे लेकिन उनके सुलझे विचार हंसमुख व्यवहार और सभी से आत्मीयता के चलते उन्हें राजनीति में नया नहीं माना गया था। 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा के चुनावों से कुछ माह पहले अर्जुन यादव और टीना यादव का यह गोपनीय धार्मिक दौरा जो बाद में थोड़ा बहुत चर्चाओं में आ गया से लगता है कि कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ योजना तो सपा मुखिया के परिवार और समर्थकों में इनके भविष्य को लेकर होने वाली चर्चा का कोई ना कोई अर्थ तो होगा ही। प्रदेश कांग्रेस के नये बने प्रभारी का यह बयान की कांग्रेस सम्मानजनक समझौता चाहती है क्योंकि सपा भले ही प्रदेश में भाजपा के बाद सबसे बड़ी पार्टी हो लेकिन चुनाव जीतने के लिए उसे भी सहयोगी दलों की आवश्यकता पूरी तौर पर है और इसलिए दोंनो में से कोई भी एक दूसरे के विरूद्ध कोई कड़वी बात नहीं बोलता है। राजनीति के इस महत्वपूर्ण समय में हो सकता है कि अर्जुन यादव व टीना यादव को कार्यकर्ताओं की मांग और राजनीतिक दावपेच तथा आम मतदाताओं की भावनाओं पर खरा उतरने के लिए यह समय चुना गया हो इससे इंकार नहीं किया जा सकता और कुछ भी हो सपा परिवार की ओर से तो इशारा इस ओर नहीं है सिर्फ आशा ही की जा सकती है। इस बारे में एक ग्रामीण कहावत सही उतरती है कि मेरे सिर पर कितने बात यजमान जब कट जायेंगे पता चल जायेगा सही उतरती लगती है क्योंकि जब दोनों राजनीति परिवार के चश्मोचिराग आगे आयंगे तो बड़े धूमधाम से उनकी एंट्री राजनीति में होगी तब सबको पता चल जायेगा और वैसे भी मेरा मानना है कि विरोधी राजनीतिक दल कितना ही परिवार वाद और वंशवाद की बात करते रहें कम या ज्यादा सबमें ऐसा है कोई भी इससे अछुता नहीं है और फिर वैसे भी डाक्टर अपने बेटे को डाक्टर बनाना चाहता है व्यापारी भी चाहता कि उसके बच्चे इसी क्षेत्र में आगे बढ़े तो यूपी के एक सफल और राजनीतिक परिवार अर्जुन यादव और टीना यादव का राजनीति में आना कोई गलत नहीं है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

