अभी तक पावर कारपोरेशन द्वारा बिजली दरों में बढ़ोत्तरी का कोई प्रस्ताव तो नहीं दिया गया है लेकिन प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की इस घोषणा के बावजूद कि अगले साल नहीं बढ़ेगी बिजली की दरें के बाद भी लगभग १० हजार करोड़ के घाटे का अनुमान दर्शाकर कुछ खबरों से पता चलता है कि विभाग बिजली दर बढ़ाने की तैयारी करने में लगा हुआ है। इससे संबंध एक खबर से पता चलता है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में कोई बढ़ोत्तरी ना होने के बावजूद कारपोरेश ने बीते शुक्रवार देर रात को २६-२७ के लिए वार्षिक राजस्व की आवश्यकता एआरआर नियामक आयोग में दाखिल कर दिया। बताते हैं कि पावर कारपोरेशन द्वारा दाखिल एआरआर १.२५ लाख करोड़ रूपये की है तो वहीं वितरण हानिया १३ फीसदी रहने का अनुमान भी बताया जा रहा है। कारपोरेशन ने करीब १.००० करोड़ रूपये दिखाया जिसका मतलब उपभोक्ताअेां से मिले राजस्व के बाद भी करीब दस हजार करोड़ का घाटा हो सकता है। इसी अंतर के बाद बिजली दर बढाने की चर्चा है।
यह सही है कि कोई भी व्यापार घाटे में आगे नहीं बढ़ सकता। लेकिन यह भी सही है कि जिस प्रकार से उद्योगपति और व्यापारी अपने घाटे का पता चलते ही उसकी रोकथाम के प्रयास शुरू कर देते हैं और ज्यादातर सफल भी हो जाते हैं। अगर उसी प्रकार से पावर कारपोरेशन जो नुकसान दिखा रही है उसे बिजली की दरें बिना बढ़ाए भी अपने खर्चों में कमी, बिजली चोरी रोक और लापरवाही के चलते हो रहे नुकसानों को रोक लें तो दरें बढ़ाने की संभावनाएं समाप्त हो सकती है और सीएम योगी द्वारा जो इस बारे में कहा गया वो भूरा हो सकता है।
बिजली विभाग के अधिकारी और मंत्री समय रहते ध्यान दें और यह समझ लें कि उपभोक्ताओं पर ज्यादा आर्थिक दबाव डालने से कई कठिनाईयां सरकार और बिजली विभाग व नागरिकों के सामने आ सकती हैं जिन्हें सबके हित में रोका जाना जरूरी है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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