विश्वविद्यालय हो या कॉलेज उत्तीर्ण छात्रों को समारोह आयोजित कर बुलाए गए मुख्य अतिथि से सम्मानित होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि होती है। अगर उसमें महामहिम राज्यपाल आ जाएं तो कहने क्या है क्योंकि समारोह सफल होता है तो विवि के लोगों का सम्मान और कार्यकुशलता की प्रशंसा होती है। चौधरी चरण सिंह विवि में विभिन्न विषयों में प्रमुख स्थान प्राप्त करने वाले छात्र छात्राओं को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मेडल दिए। यहां तक तो ठीक था लेकिन उसके बाद अपने मुंह मिठठु बनने की कहावत को साकार करते हुए अफसरों व कर्मचारियों की गई वो समझ से बाहर है। इस आयोजन के लिए बनी समितियों के सदस्यों व पदाधिकारियों को विवि के सुभाषचंद्र बोस प्रेक्षागृह में धन्यवाद समारोह में सम्मानित कियागया। दीक्षांत समारोह की सफलता के लिए सबकी प्रशंसा की गई।
सवाल उठता है कि जितनी समितियां आयोजन के लिए बनाई गई उसमें शामिल प्रोफेसर व अधिकारी व कर्मचारियों को हर माह वेतन और सुविधाएं मिलती हैं और समय समय पर उनमें बढ़ोत्तरी की जाती है तो फिर समारोहों को सफल बनाना इनकी जिम्मेदारी थी तो इन्होंने अलग से ऐसा कौन सा काम किया जो सम्मान समारोह आयोजित किया गया। मुझे लगता है कि दीक्षांत समारोह संपन्न होने के लिए विवि के छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जाना चाहिए था क्योंकि इनके संयम और धैर्य के चलते कार्यक्रम की गरिमा बनी रही वरना आए दिए जो अनियमितताओं को लेकर आंदोलन होते हैं उन्हें लेकर आवाज उठती तो विवि प्रशासन की कितनी छिछालेदार होती उसका अंदाजा लगाया जासकताहै। दीक्षांत समारोह में छात्रों कोसम्मानित किया गया लेकिन मेरठ कॉलेज व अन्य कॉलेज के प्रबंध समिति के पदाधिकारियों को आमंत्रित नहीं किया गया यह विषय भी चर्चा का है। विवि ने अपने से संबंध कॉलेज के पदाधिकारियों का निमंत्रण भेजने लायक क्यों नहीं समझा इसके लिए कितने ही लोग आयोजकों की आलोचना करते सुने गए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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