रेरा को लेकर पूर्व में जो टिप्पणियां हुई और सवाल उठे उसका असर कहें या इसके चेयरमैन संजय भूसरेडडी की कार्यप्रणाली जो भी बीते दिवस चौधरी चरण सिंह विवि के अटल सभागार में अफसरों व बिल्डरों का सेमिनार हुआ जिसमें उपभोक्ता कम अवैध निर्माणकर्ता और सरकार की निर्माणनीति का उल्लंघन करने वाले नागरिकों के अनुसार ज्यादा नजर आ रहे थे। सुधार नहीं करने वालों ने ही सवाल उठाए और उन्होंने ही समाधान किया।सेमिनार में निवेश से पहले संबंधित बिंदुओं की जांच रेरा अधिनियम की जांच, खरीद के दस्तावेज सुरक्षित रखने के बारे में बताया गया। मौजूद लोगों का कहना है कि जिन्हें उपभोक्ताओं के रुप में बुलाया गया वह मेडा के अफसरों के चहेते थे। इसलिए सबकुछ ठीक संपन्न हो गया। कुछ माह पहले राज्यसभा में डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने रेरा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया था तो अदालत ने इसकी उपलब्धता पर सवाल खड़ा कर दिया था। फिर भी रेरा अस्तित्व में है और पहली बार अपने गठन के बाद उसके अधिकारियों ने इस जागरुकता कार्यशाला का आयोजन किया। मीडिया में खबरें आई और चहेतों ने इसके बारे में अच्छा चलाया बुरा उन्हें दिखाई नहीं देता। सेमिनार में कहा गया कि कंपनियों के नियमों में उलझा रेरा निकालेगा समाधान नगर निगम को हस्तांरित कॉलोनियों और आरडब्लयू को बतायागया। मगर आयोजन में आवास विकास नगर निगम और मेडा द्वारा अवैध निर्माण कराने और कच्ची कॉलोनियां कटवाई जा रही है उन्हें उनकी जिम्मेदारी का अहसास नहीं कराया उपस्थितों का कहना है। एक सज्जन का कहना था कि प्रथम श्रेणी में वो बिल्डर बैठे थे जिन्होंने अवैध निर्माण कराने कच्ची कॉलोनियां काटने थोड़ृे से नक्शे पर बड़े क्षेत्र को विकसितकर दिया। वो ही सवाल पूछने वाले थे और वो ही मुख्य। इससे यह ही पता नहीं चला कि रेरा के इस आयोजन का मुख्य उददेश्य की पूर्ति कहां हुई। एक सज्जन का कहना था कि रेरा में अवैध निर्माण की शिकायत की गई जिस पर अधिकारी ने नक्शा पास बताकर सही ठहराया। जबकिमौके पर राजलोक के निकट बनी पूरी बिल्डिंग नियमों पर खरी नहीं उतरती। प्रतिबंध के बावजूद बेसमेट बना बैंक व होटल खुल गए लेकिन रेरा के अधिकारियों कोवहां कुछ गलत नजर नहीं आया। संजय भूसरेडडी ने जांच पड़ताल के बाद ही घर खरीदने का आहूवान किया। सवाल उठता है कि रेरा में कितनेही बिल्डर रजिस्ट्रेशन नहीं करा रहे। निर्माण के बाहर मानचित्र पास का नक्शा नहीं लगाते फिर भी सब सही नजर आता है आखिर ऐसा क्यों। संजय भूसरेडडी जी एक बार जिलों का दौरा कीजिए तो लिंक मार्ग और नई कॉलोनियों में भी रेरा की नीतियों का उल्लंघन होता नजर आएगा। जिन कॉलोनियों के ध्वस्त करने की खबरें छपवाई जाती है वो काल्पनिक लगती है और कच्ची कॉलोनियों के बारे में तो कुछ नहीं कहा जा सकता। सही स्थिति पता लगाने के लिए आम आदमी को बुलाइये वो बताएगाकि बिल्डरों व अधिकारियो की मिलीभगत से किस प्रकार निर्माण नीति को पलीता लगाया जा रहा है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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