कुछ दिन पूर्व माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा आम आदमी की पीड़ा को ध्यान में रखते हुए हमारा कुत्तों से नागरिकों के बचाव हेतु एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया गया अगर उसे लागू कर दिया जाये तो शायद कुत्ते काटने की जो घटनाएं और समाचार जो सुनने को मिलते हैं अगर वह समाप्त नहीं तो कमी जरूर आएगी। क्योंकि इस संदर्भ में माननीय न्यायालय के द्वारा जो फैसले दिये गये वह इतने विस्तार से हैं कि उनका अगर पालन हो जाये तो या जो मुद्दा नागरिकों के लिए जो विकराल बनता जा रहा है उसका समाधान हो सकता है।
लेकिन कुछ मामलों को लेकर अगर सोचा जाये तो सरकार द्वारा हर तरह की सुविधा और आर्थिक सहायता दिये जाने के बावजूद भी संबंधित विभागों के अफसरों की कार्यप्रणाली के चलते यह आदेश और निर्देश जो जनहित के है लागू नहीं हो पा रहे हैं।
यहीं नहीं कई बार पढ़ने को मिला कि भयंकर आवाज में बजने वाले डीजे की आवाज कम करने और उसके चलाने के लिए समय निर्धारित होने के बाद भी कहीं कहीं देर रात तक और तेज आवाज में तो हमेशा ही यह बजते नजर आ जाएंगे ऐसा ही और अन्य मामलों में भी पढ़ा और सुना मगर कुछ संबंधित अफसरों की लापरवाही के कारण न्यायालय और सरकार के आदेशों का पालन न हो पाने के चलते कम होने की बजाये कुत्ता काटे की घटनाएं बढ़ रहीं है। डीजे की आवाज और तेज हो गयी है और अन्य मामलों में भी आदेशों का पालन और उसकी मंशा पूर्ण नहीं हो पा रही है। आम आदमी की मांग है कि जो नियम और कानून बनाये जा रहे हैं उन्हें लागू कराने की व्यवस्था भी जिम्मेदारों से की जाये क्योंकि यह तो तीन ज्यादा परेशान करने वाले मामले हैं बाकी ज्यादातर विभागों में आसानी से यह देखने को मिल सकता है कि कई जिम्मेदार अधिकारी आदेशों को ताक पर रख अपने हिसाब से काम करते हैं और इसके उदाहरण के रूप में विकास प्राधिकरणों, नगर निगम व स्थानीय निकायों में खूब देखने को मिल सकता है। मुझे उम्मीद है कि अगर इन विभागों में सुधार कर लिया जाये तो अन्य में अपने आप ही सब ठीक हो जाएगा बस सरकार यह सुनिश्चित करें कि उसके निर्देश और अदालत के फैसले लागू हो सके और कार्यवाहीं असहाय और गरीबों के खिलाफ न कर इन क्षेत्रों में मठाधीशों के खिलाफ की जाये।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स मेरठ)
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