चुनाव आयोग द्वारा बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि वह नागरिकता का निर्धारण मतदाता के पंजीकरण के रूप में ही कर सकता है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने हल्के फुल्के अंदाज में खबर के अनुसार टिप्पणी करते हुए कहा कि अगले चुनाव तक आनलाइन मतदानन शुरू हो जाए तो हमें हैरानी नहीं होगी। बता दें कि सीजेआई की पीठ के समक्ष आयोग के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश त्रिवेदी ने कहा था कि आयोग किसी को भी निर्वासित नहीं कर सकता। यह भी तय नहीं कर सकता कि किसी व्यक्ति के पास भारत में रहने का वीजा है या नहीं। उन्होंने याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई फिर से शुरू करने की बात करते हुए आयोग की मतदाता सूची के एसआईआर की कवायद को चुनौती दी थी। अधिवक्ता त्रिवेदी ने आयोग के समर्थन में संविधान के अनुच्छेद ३२६ का हवाला दिया। मामला क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है इसलिए इस पर टिप्पणी करना मेरे लिए उचित नहीं है लेकिन यह जरुर कह सकता हूं कि सीजेआई ने जो टिप्पणी हल्के फुल्के अंदाज में की वह अगर साकार रूप ले और देश में ऑनलाइन मतदान होने लगे तो आम आदमी पर बड़ा उपकार होगा क्योंकि आए दिन होने वाले चुनावों पर जो सरकारी मशीनरी लगती है और पैसा लगता है उसकी बचत होगी। जिससे आम आदमी पर जो टैक्स लगने की संभावनाएं बढ़ती है उन पर विराम लगेगा। दूसरे मतदान व मतगणना पर जो जनशक्ति लगाई जाती है वो और कार्यों में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। जो दबंगई व फर्जी मतदान के मामले सुनने को मिलते हैं उनमें भी कमी आएगी। इसलिए जो भी आनलाइन मतदान की व्यवस्था को साकार रूप दे सकता है उसे जनहित में यह काम करना ही चाहिए।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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