देश में मानव खूबसूरती कहां और किस रुप में मिल सकती है इसका अंदाजा आसानी से कोई नहीं लगा सकता भले ही दुनिया कितनी प्रगति कर रही हो लेकिन गांव से लेकर शहरों तक खासकर आदिवासी क्षेत्रों में कभी कभी बेमिसाल खूबसूरती जगह जगह देखने को मिलती है ऐसे में किसी एक महिला या युवती को दुनिया की सबसे खूबसूरत कोई नहीं कह सकता। वो बात दूसरी है कि फिल्मों मैगजीनो फैशन शो आदि में जो युवतियां भाग लेती है उनमें से कोई एक सबसे खूबसूरत और आकर्षक व मानवीय भावनाओं से ओतप्रोत हो सकती है। इस रुप में उसे सबसे खूबसूरत प्रतियोगियों में से एक कहा जा सकता है। इसलिए मेरा मानना है कि फिल्म हो या फैशन शो व मैगजीन को किसी महिला को दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला बताने का अधिकार नहीं है। यह बड़े बड़े फैशन शो कर्ता अपने आप को श्रेष्ठ दर्शाने और नाम कमाने के लिए ऐसा कर रहे हैं वो किस श्रेणी में खूबसूरत नजर आने वाले बच्चों के परिवारों और उनका भावनात्मक रुप से अपने शब्दोंसे मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न कर रहे हैं। क्योंकि किसी भी कार्यक्रम में शामिल कुछ प्रतियोगियों में से किसी एक को नंबर वन पर छांटकर दुनिया की सबसे खूबसूरत और कामयाब नहीं कहा जा सकता। वर्तमान समय में तो जो जागरुकता स्वास्थ्य के प्रति उत्पन्न हो रही है उसमें इस मामले में मानव जाति की एक बड़ी संख्या को इस पर में सोचने और अपने आप को खूबसूरत दर्शाने के लिए प्रेरित किया है।
हो सकता है कि मेरी सोच किसी को अजीब लगे लेकिन सादगी में जो खूबसूरती और आकर्षण होता है वो बड़ी कंपनियों के फैशन और सौंदर्य सामग्री का उपयोग वो खूबसूरती नहीं प्रदान कर सकता तो भगवान द्वारा व्यक्ति को ओरिजनल रुप में दी गई है। तीन दशक पहले यूपी के मेरठ में लगने वाला नौचंदी मेला में घूम रहा था। वहां खादी की साड़ी और कमीज पहने एक लड़की नजर आई। उस जैसी खूबसूरती आज तक कहीं देखने को नहीं मिली। कहने का आश्य है कि सुंदरता कब कहां देखने को मिल जाए उस बारे में कोई नहीं कह सकता।
प्यूपिल मैगजीन द्वारा
यह घोषणा एक शानदार फोटोशूट के साथ की गई जिसमें वह बेहद खूबसूरत लग रही थी। मैं यह नहीं कहता कि हैथवे खूबसूरत नहीं है लेकिन वो मैगजीन की प्रतियोगिता में हो सकती है पूरी दुनिया में नहीं। इससे संबंध एक खबर के अनुसार 2026 की श्दुनिया की सबसे खूबसूरत स्टार्य कोई और नहीं, बल्कि ऐन हैथवे हैं, जिन्होंने अपनी सहज सुंदरता और स्टार पावर से इस लिस्ट में आधिकारिक तौर पर पहला स्थान हासिल किया है। यह घोषणा एक शानदार फोटोशूट के साथ की गई, जिसमें वह ब्लैक कलर के बैकलेस और ऑफ-शोल्डर आउटफिट में बेहद खूबसूरत लग रही थीं।
हैथवे, जिन्होंने दो दशकों में हॉलीवुड में सबसे शानदार करियर में से एक बनाया है, ने इंस्टाग्राम पर लिखा, श्मुझे अपने कवर पर जगह देने के लिए प्यूपिल मैगजीन का बहुत-बहुत धन्यवाद्य।
मिरांडा, एंडी, एमिली और नाइजेल के तौर पर फैशन की दुनिया पर पहली बार राज करने के दो दशक बाद, मेरिल स्ट्रीप, ऐन हैथवे, एमिली ब्लंट और स्टेनली टुची श्रनवे्य की ग्लैमरस दुनिया में वापसी करने के लिए तैयार हैं। वे वही स्टाइल, ड्रामा और तेज हाजि़रजवाबी वापस ला रहे हैं, जिसने 2006 की इस फिल्म को एक सांस्कृतिक मिसाल बना दिया था।
जिस सीक्वल का बेसब्री से इंतजार था, वह एक बार फिर ओरिजिनल कास्ट को डायरेक्टर डेविड फ्रैंकल और राइटर एलीन ब्रॉश मैककेना के साथ मिलाता है। साथ ही, यह केनेथ ब्रानघ, सिमोन एशले, जस्टिन थेरॉक्स, लूसी लियू, पैट्रिक ब्रैमॉल, कैलेब हीरॉन, हेलेन जे. शेन और बी.जे. नोवाक जैसे नए चेहरों के साथ इस दुनिया को और भी बड़ा बनाता है। पुरानी यादों को ताजा करते हुए, ट्रेसी थॉम्स और टिबोर फेल्डमैन लिली और इर्व के तौर पर अपनी भूमिकाओं में वापस आए हैं।
ऐन हैथवे के बारे में
ऐन हैथवे एक अमेरिकी अभिनेत्री हैं, जो फिल्म और टेलीविजन में अपने बेहतरीन काम के लिए जानी जाती हैं। पिछले कुछ सालों में, उन्हें कई बड़े सम्मान मिले हैं, जिनमें एक एकेडमी अवार्ड , एक गोल्डन ग्लोब और एक प्राइमटाइम एमी अवार्ड शामिल हैं। उनकी फिल्मों ने दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर कुल मिलाकर $6.8 बिलियन से ज्यादा की कमाई की है, और 2015 में उन्हें दुनिया की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली अभिनेत्रियों में भी शामिल किया गया था। नेटवर्थ की बात करें तो एनी 7 अरब की मालकिन हैं।
मैं मैगजीन संचालकों व फोटोशूट आयोजकों और ना हैथवे की खूबसूरती को नकार रहा हूं लेकिन जिस शीर्षक से यह खबर छपी उससे उन खूबसूरत महिलाओं को दुख हो सकता है जो सुंदरता मानवीय अभिव्यक्ति में शीर्ष स्थान पर हो सकती है मगर उन्हें कहीं मौका नहीं मिला। इसलिए वह ऐसे ताज नहीं पहन पाती। देश में किसी की भावनाओं को आहत करने का अधिकार किसी को नहंीं दिया गया है। इसलिए मेरा मानना है कि केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय ऐसे टाइटिल से खबर छापने वालों पर रोक लगाएं। हां आयोजक मैगजीन की सबसे खूबसूरत शीर्षक चल सकता है। लेकिन दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला बनी वाला शीर्षक सहीं नहीं कहा जा सकता। अगर उन्हें खूबसूरती देखी है तो गांव देहातों से लेकर आदिवासी क्षेत्रों तक खोज करनी होगी जिससे उन्हें पता चले कि ओरिजनल खूबसूरती क्या होती है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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