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    Home»देश»माननीय प्रधानमंत्री जी, मुख्यमंत्री जी की सुनियोजित विकास का सपना कैसे हो साकार, जब राजनेता ही कच्ची कालोनी अवैध निर्माण और भूमाफियाओं का समर्थन कर रहे है, 80 प्रतिशत शिकायतों का हुआ फर्जी निस्तारण
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    माननीय प्रधानमंत्री जी, मुख्यमंत्री जी की सुनियोजित विकास का सपना कैसे हो साकार, जब राजनेता ही कच्ची कालोनी अवैध निर्माण और भूमाफियाओं का समर्थन कर रहे है, 80 प्रतिशत शिकायतों का हुआ फर्जी निस्तारण

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comMay 29, 2026No Comments60 Views
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    मेरठ, 29 मई (दैनिक केसर खुशबू टाईम्स)। देश के माननीय यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और अन्य प्रमुख मंत्री तथा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ जी सहित तमाम जनप्रतिनिधियों का प्रयास है कि शहरों का सुनियोजित विकास हो कच्ची कालोनियां और अवैध निर्माण रूके तथा कोई भी सरकारी भूमि ना घेर पाये के लिए केन्द्र और प्रदेश में जब से सरकार आयी है ईमानदार प्रयास किये जा रहे हैं तथा समय समय पर इस व्यवस्था से जुड़े प्रशासनिक पुलिस और विकास से जुड़े अधिकारियों को निर्देश और आदेश भी दिये जा रहे हैं।
    मगर वह कौन सा कारण है कि कच्ची कालोनियों का विस्तार और अवैध निर्माण और सरकारी भूमि घेरने की लालसा कम होने की बजाये सुरसा के मुंह की भांति बढ़ती ही जा रही है। इस संदर्भ में जब सुनियोजित विकास और इन कार्यों का विरोध करने वाले जागरूक नागरिकों से संपर्क कर विचार किया गया तो उनका स्पष्ट कहना था कि कच्ची कालोनियां अवैध निर्माण और सरकारी जमीन घिरने से कैसे रोक सकते हैं संबंधित अधिकारी क्योंकि यह काम तो अब आम आदमी कम और राजनीतिक दलों के पदाधिकारी नेता ज्यादा कर रहे हैं और अपनी बात के समर्थन में नागरिकों का कहना है कि पिछले एक साल में जितनी कच्ची कालोनियां ध्वस्त करने या अवैध निर्माणों पर सील लगाने अथवा सरकारी भूमि घेरने के मामले सामने आये हैं उनमें सीधे-सीधे या घुमाफिराकर राजनीतिक दलों के नेताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका खुलकर सामने आयी है। कई बार तो मीडिया में इनकी पार्टी और इनके नाम लेकर भी खबरे छपी हैं और अगर कहीं थोड़ी बहुत कार्यवाही के प्रयास हुए भी है तो अब तो नए नए नेता उद्योगपतियों व्यापारियों और डाक्टरों से मिलीभगत कर छोटी-छोटी बड़ी बड़ी कालोनियां खूब काट रहे है। सील तोड़कर कार्य किये जा रहे हैं मजबूत लोग इस काम में संलग्न है इसलिए एप्लीकेशन पर थाने में एफआईआर भी नहीं होती।
    कुछ प्रमुख नागरिकों का यह भी कहना है कि ज्यादातर सुनियोजित विकास अवैध निर्माण और कच्ची कालोनियों व सरकारी जमीन घेरे जाने के मामले में बिल्डर और संबंधित ज्यादातर अधिकारियों की मिलीभगत सामने आती है तो भला कार्यवाही कैसे हो।
    मजे की बात यह है कि अवैध निर्माण कर्ता कच्ची कालोनी काटने वाले और सरकारी जमीन घेरकर बेचने वाले कितने होशियार हो गये है कि मानचित्र पास बताकर मंत्री सांसद और बड़े नेताओं को अपनी कालोनियों के शुभारंभ में बुला लेते हैं और क्योंकि सही जानकारी नहीं होती इसलिए अतिथि भी चले जाते हैं।
    देखने में आ रहा है कि इन कालोनियों और अवैध निर्माणों में शासन की नीतियों के तहत मानचित्र पूरी तौर पर निर्माणाधीन कालोनी या अवैध निर्माण के बाहर नहीं लगाया जाता और अब तो पता चला है कि रेरा की नई नीति के तहत जो नियम बने हैं उनका पालन करने हेतु रेरा में इन कार्यों से संबंध लोग बड़े लोगों तक अपनी अप्रोच बताकर रेरा में अपने रजिस्ट्रेशन भी नहीं करा रहे हैं।
    इस समय देश की अदालतों में कई मामले चल रहे हैं जिनमें बिल्डर ने सब्जबाग दिखाकर कालोनियां और निर्माण बेच दिये लेकिन उन्हें पूरा करके नहीं दिये या नियमानुसार पास होने की बात कहकर अवैध निर्माण सौंप दिये गये जिनको लेकर इनके विरूद्ध अदालतों में बड़े बड़े मामले चल रहे है और कई जेल में भी है।
    मौखिक जानकारी के अनुसार मवाना रोड पर स्थित जेपी रेजिडेंसी सरधना में भूनी टोल पर स्थित श्रीकुंज तथा गढ़ रोड पर छोटा हसनपुर के निकट कट रही कालोनी निकंज कुंज को देखा जा सकता है। जानकारों का कहना है कि इन कालोनियों को काटने वालों ने भू उपयोग भी परिवर्तित नहीं कराया है और जो सही नियम से बताई गयी उसमें दो-तीन प्लाट और मकान पास कराकर बाकी अवैध रूप से कालोनी विकसित करायी जा रही है जो सरकार की निर्माण नीति का खुला उल्लंघन है ही ऐसी कालोनियां सही प्रकार विकासित होने पर जो राजस्व सरकार को मिलता है उसकी भी चोरी हो रही है और सुनियोजित विकास और सौंदर्यकरण योजनाओं को तो यह पलीता लगा ही रहे हैं।
    माननीय मुख्यमंत्री जी ऐसे मामलों में अब संबंधित विभाग के अधिकारियों की अब तक की कार्यप्रणाली और अवैध काम करने वालों की मिलीभगत को देखते हुए नागरिकों को आशा है कि आपके स्तर पर ही कुछ हो सकता है तो हो सकता है संबंधित अधिकारी तो कार्यालयों से निकलकर कहीं जाना ही नहीं चाहते इसलिए जो सीधे अवैध निर्माण से जुड़े जेई और एई तो जीआरएस पर हुई शिकायतों के निस्तरण पर फर्जी रिपोर्ट लगाने से ज्यादा कुछ नहीं कर रहे हैं और इस बात की सत्तयता देखनी है तो पिछले दो साल में कच्ची कालोनियों अवैध निर्माण और सरकारी जमीन घेरने में से संबंध जो शिकायतें माननीय मुख्मंत्री जी के पोर्टल पर हुई उनमें से जानकारों का मानना है कि 80 प्रतिशत से ज्यादा शिकायतों का फर्जी निस्तारण निर्माणकर्ता को फायदा पहुंचाने और कुछ जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अपनी जेब भरने के लिए किया गया है जो जांच में स्पष्ट हो सकता है।

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