प्रदेशवासियों को हर संभव सुविधाएं दिलाने और उनकी परेशानियां दूर करने व खुशहाली तथा भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था बनाने में लगे यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा जनहित में किए जा रहे कार्यों को भुलाया नहीं जा सकता। इस कड़ी में जो जरुरतमंदों को घर व व्यापार के लिए दुकान तथा उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु निर्माण के नियमों में दी जा रही ढील सराहनीय है। लेकिन गत दिवस सीएम की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में जो फैसला हुआ कि कृषि भूमि पर बिना भूउपयोग बदले ही लगा सकेंगे उद्योग इससे ऐसा लगता है कि अभी तक जो कुछ बिल्डरों आदि द्वारा औद्योगिक कॉलोनियां काटी जाती है और मकान दुकानें बनाई जाती है उनमें जो अनियमितताएं निर्माण नीति का नजरअंदाज कर बरती जाती रही है उससे देहात से लेकर शहरों तक खेती की भूमि और वन समाप्त हो रहे हैं। ऐसे में पर्यावरण संतुलन की समस्या तो पैदा होगी ही हर व्यक्ति को आसानी से भोजन भी उपलब्ध नहीं हो पाएगा क्योंकि कृषि भूमि पर बिना भू उपयोग बदलवाए उद्योग लगाने की छूट लोगों को निरंकुश बना देगी।
मुख्यमंत्री जी अभी तक की स्थिति पर आप सर्वे कराएं तो शहरों के सुनियोजित विकास निर्माण नीति का पालन कराने के लिए तैनात कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से जो अविकसित विकास हो रहा है उसमें हवा पानी को प्रभावित तो किया ही है सारी संरचाएं बिगाड़ दी है। उद्योगों को बढ़ावा देने की नीति आपकी अच्छी है लेकिन पूर्व मेें जो नीति और नियम बने वो कितने कारगर हुए इस सर्वे कराया जाए और जितनी छृट वर्तमान में सरकार द्वारा निर्माण में लगे लोगों को दी गई है वो कम नहीं है मगर उनका पालन अगर पूर्व की भांति हुआ तो यह उद्योगों के लिए जो व्यवस्था बनी है उससे गावों व शहरों में जगह ही नहीं बचेगी जिससे आम आदमी ताजा हवा में घूम सके। अभी भी प्रदेश के जिलों में एक हजार गज में नक्शा पास कराकर ५० हजार गज में नागरिकों के अनुसार जो रिहायशी व औद्योगिक कॉलोनी काटी गई है उसका सर्वे समिति बनाकर कराकर रिपोर्ट मंगाई जाए तो पता चलेगा कि पैसा कमाने की धुन में लोग किस प्रकार वनों व खेती की जमीन का दोहन कर रहे हैं। मेरा आश्य सिर्फ इतना है कि प्रदेश के विकास औद्योगिक का्रंति के लिए नियमों को नजरअंदाज कर यह कार्य नहीं होने चाहिए वरना एक तरफ हम सुविधा दे रहे हैं दूसरी तरफ सड़कों की चौड़ाई कम होने से जो जाम लगेगा और कृषि भूमि पर उद्योग लगने से जो अन्न की कमी होगी उसका समाधान आसानी से नहीें होगा।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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