सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के टेलिफोन के बाद जिस प्रकार से अयोध्या के राम मंदिर में धन सोना चांदी की चोरी और कीमत से ज्यादा में खरीदी गयी जमीनों की खबरें जो पढ़ने सुनने को मिल रही है उसने आम आदमी को आश्चर्यचकित कर दिया है कि देश के प्रधानमंत्री जी नरेन्द्र मोदी जी द्वारा जिस प्रकार से धार्मिक भक्तों की भावनाओं से साथ राम मंदिर का निर्माण कराया योगी आदित्यनाथ जी के सहयोग से मगर जब अब चंपत राय और गोपाल राय जैसे चर्चित नामों ने इस्तीफा दिया और अन्य के विरूद्ध एफआईआर भी हो सकती है जल्द ही गिरफ्तारी की सूचना भी मिल सकती है क्योंकि चढ़ावा चोरी में 8 आरोपियों के घर नगदी व जेवर बरामद किये कुछ गणनाकर्मियों को हटाने की सिफारिश पर चंपत राय ने ढील क्यों दी यह तो वहीं जाने मगर अब पूरे देश में बड़े धार्मिक स्थानों की जांच की मांग उठने लगी है। ऐसी मांग करने वालों का कहना है कि जब देश के धार्मिक जनों की भावनाओं के प्रतीक मंदिरों में प्रसाद के रूप मंें मिलावटी लड्डू बांटे जा सकते हैं खजाने में से सोना चांदी हीरे चोरी हो सकते हैं और राम मंदिर अयोध्या में जो हुआ उसके बाद कुछ भी हो सकता है यह बात सही है कि अयोध्या मामले में नौकरशाही का दखल संतों को मंजूर नहीं मगर इन मुद्दों पर कुछ ना कुछ निर्णय तो लेना ही पड़ेगा फिलहाल हम अपने यूपी के ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान रखने वाले मेरठ शहर मंे स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि से जुड़े उत्तरी भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में गिने जाने वाले काली पल्टन औघड़नाथ मंदिर जिसमें हजारों की तादाद में प्रतिदिन और त्योैहारों पर लाखों श्रद्धालु आते हैं और चढ़ावा चढ़ाते है में आने वाले दान दक्षिणा की हर पहलू से जांच हो हम यह नहीं कहते कि अगर अन्य मंदिरों में कोई घपला निकला तो यहां भी निकलेगा लेकिन अब जब आम आदमी में चर्चा शुरू हुई है तो पिछले कई दशक से जो दान दक्षिणा आती है उसका हिसाब किताब जांच में हो वह धन कहां रखा जाता है और चढ़ावे की सुरक्षा कैसे की जाती है और मंदिर के पास अपनी सोना चांदी और धन कितना है यह आम भक्तों को पता चलना ही चाहिए मैं यह तो नहंी कहता कि मंदिर कमेटी इसका हिसाब ना रखती होगी लेकिन खुलकर इससे संबंध विवरण आम भक्तों को पता नहीं चलता जो सबसे जरूरी है मेरा मानना है कि काली पल्टन औघड़नाथ मंदिर के खजाने का सत्यापन हो इन पदाधिकारियों की मौजूदगी हो या किसी अन्य की उपस्थिति मे जो भी पादर्शी वातावरण कायम होना ही चाहिए क्योंकि जैसा बताते हैं कि कमेटी के अलावा भी कई पदाधिकारियों के पुत्र और अन्य संबंधियों की उपस्थिति मंदिर में रहती है और इनमें से एक आध संदेह के दायरे में भी चर्चानुसार बताया जाता है वह कौन है खबर लिखे जाने तक यह पता नहीं चला लेकिन मंदिर सभी की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है इसलिए यहां का हर काम साफ सुथरा हो यह वक्त की सबसे बड़ी मांग हैं इसलिए उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से आग्रह है कि नागरिकों में धर्म के प्रति जो भावना है वह बनी रहे और वह खुलकर किसी भी रूप में हो दान और चंदा दें इसलिए काली पल्टन मंदिर सहित सभी धार्मिक स्थानों जिनमें भक्तों का आवागमन बड़ी तादाद में होता हो उसको ध्यान में रखते हुए स्थिति स्पष्ट करने के लिए काली पल्टन मंदिर कमेटी में 50 साल में आये धन की जांच हो और वर्तमान में कितना है और माह में कितना खर्च होता है इसका खुलासा होने के साथ ही मंदिर में कुछ ही व्यक्तियों का कब्जा बना ना रहे इसके लिए संविधान के अनुसार पारदर्शी वातावरण में यहां चुनाव कराये जायें क्योंकि कुछ लोग बैठे और आपस में चुनाव करा तू अध्यक्ष मैं महामंत्री सहित सभी का चुनाव हो गया और आम चंदेदारों को पता भी नहीं लगा यह वक्त की सबसे बड़ी मांग है कि धार्मिक स्थानों में पारदर्शी वातावरण बने और आये चंदे और दान में किसी अधिकारी की उपस्थिति मेें गणना के बाद उसका प्रकाशन किया जाये।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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