बिलासपुर, 11 मार्च (जा)। छतीसगढ़ हाई कोर्ट ने 20 साल के बाद दुष्कर्म के आरोपित को दोषमुक्त कर दिया । उच्च न्यायालय ने कहा है कि शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाना दुष्कर्म नहीं है। इस मामले में पीड़िता की उम्र घटना के समय लगभग 26 वर्ष थी और उसे संबंधों के परिणामों की जानकारी थी। इस आधार पर हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दोषमुक्त करते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई सात साल की सजा को रद कर दिया।
सरगुजा की एक युवती ने वर्ष 2004 में याचिकाकर्ता के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। युवती ने सितंबर 2000 से अप्रैल 2004 तक शादी का झांसा देकर उसके साथ लगातार शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर चालान न्यायालय में पेश किया। सत्र न्यायालय ने आरोपित को दोषी करार देते हुए सात वर्ष की कैद और 5,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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