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    Home»न्यूज़»इंजीनियर की मौत मामले में पांच बिल्डरों को हिरासत में भेजा
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    इंजीनियर की मौत मामले में पांच बिल्डरों को हिरासत में भेजा

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJanuary 22, 2026No Comments1 Views
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    ग्रेटर नोएडा, 22 जनवरी। इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में पुलिस ने एक और एफआईआर दर्ज की है। इसमें पांच बिल्डर को नामजद किया गया है। नॉलेज पार्क थाने के उप निरीक्षक रीगल सिंह की शिकायत पर नॉलेज पार्क थाने में बिल्डर अभय कुमार, संजय कुमार, मनीष कुमार, अचल बोहरा और निर्मल कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। उप निरीक्षक के मुताबिक, वह क्षेत्र में निरीक्षण के लिए निकले थे। तभी उन्होंने देखा कि एक भूखंड में गहरा गड्ढा बना हुआ है जिसमें पानी भरा है और कूड़ा कचरा पड़ा हुआ है। यहां ना कोई बैरिकेडिंग और न कोई रिफ्लेक्टर लगाया गया है। इस भूखंड के स्वामी के बारे में पता किया गया तो पता लगा कि यह जमीन वर्ष 2014 में लोटस ग्रीन बिल्डर द्वारा खरीदी गई थी। इसके बाद वर्ष 2020 में भूखंड को विजटाउन बिल्डर ने खरीद लिया। उन्होंने कहा, इनके द्वारा किया गया यह कृत्य पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जल प्रदूषण अधिनियम का उल्लंघन है।
    बिल्डर परियोजना के निर्माणाधीन बेसमेंट के गड्ढे में डूबकर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में एसआइटी ने नोएडा विकास प्राधिकरण के चार विभागों को कठघरे में खड़ा किया है। इन सभी से लिखित जवाब तलब किए गए हैं। प्राधिकरण अधिकारी गुरुवार को जवाब सौंप सकते हैं। उधर, सीजेएम कोर्ट ने आरोपित बिल्डर अभय को 27 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। गत दिवस फारेंसिक और टेक्निकल टीम ने घटनास्थल और कार की तकनीकी जांच की।
    एसआइटी ने प्राधिकरण के सिविल, एनटीसी, नियोजन और जल खंड विभागों को कटघरे में खड़ा करते हुए जवाब तलब किया है। सिविल विभाग का काम निर्माण था। ड्रेनेज टूटी थी तो रखरखाव क्यों नहीं किया गया। नोएडा ट्रैफिक सेल (एनटीसी) ने सड़क पर यातायात सुरक्षा के लिहाज से उपाए क्यों नहीं किए। नियोजन विभाग की स्पो‌र्ट्स सिटी बसाने के लिए क्या योजना थी।एक बिल्डर को 13 लाख वर्गमीटर जमीन आवंटित की थी तो उसने प्लॉट को 21 भूखंड में कैसे बेच दिया। आक्यूपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (सीसी) जारी करने के क्या नियम हैं। बिना बुनियादी सुविधा 150 सेक्टर की सोसायटियों को अधिभोग प्रमाण पत्र कैसे प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। जल सीवर विभाग से ड्रेनेज सिस्टम तैयार न करने का कारण पूछा गया है।
    वित्तीय अनियमितताओं को देख नोएडा प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारी ने सिविल और दूसरे खंडों में कोटेशन के जरिये एक से पांच लाख तक के सभी कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। सिविल, जल, विद्युत यांत्रिकी, उद्यान, जन स्वास्थ्य और अन्य विभागों से संबंधित सिविल और अनुरक्षण कार्यों की सैद्धांतिक स्वीकृति अपर मुख्य कार्य पालक अधिकारी से मिलती है। इन सभी कार्यों की टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। सोसायटी के सभी पत्रों पर अनुमोदन मिल चुका था, लेकिन टेंडर प्रक्रिया नहीं हो सकी थी। इसलिए कार्य होने में समय लगा।
    चार दिन बाद भी घटना स्थल की तस्वीर नहीं बदली है। सिर्फ पुलिस की ओर से बैरिकेोडग लगे हैं। भारी पुलिस बल तैनात है, न तो स्पीड ब्रेकर पर थर्माे प्लास्टिक पेंट किया गया, न टूटी ड्रेनेज से प्लाट में पानी को जाने से रोका गया। लगातार पानी प्लाट में जा रहा है।
    घटना स्थल से 50 मीटर पहले और 50 मीटर आगे तक अब भी वहीं हाल है। खतरा अब भी बना हुआ है। तैराक डिलीवरी ब्वाय को पुलिस ने भगा दिया था डांटकर जब इंजीनियर युवराज मेहता जान बचाने की गुहार लगा रहे थे तो उसी समय वहां पर कुछ डिलीवरी ब्वाय पहुंचे थे। इनमें से कुछ लोग तैरना जानते थे।
    युवराज की गुहार पर कई डिलीवरी ब्वाय का दिल पसीज गया था। वे भयंकर सर्दी में भी पानी में कूदने के लिए तैयार थे। उन्होंने पुलिस से पानी में उतरने की इच्छा भी जताई, लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने ना केवल उन्हें पानी में उतरने से रोका, बल्कि उन्हें वहां से डांटकर भगा भी दिया।
    जवान बेटे को डूबने से न बचा पाने की बेबसी पिता राजकुमार मेहता को इस कदर कचोट रही है कि वे बार-बार फफक-फफककर रोने लगते हैं। अंतिम समय में जान बचाने के लिए पिता से गुहार लगाते हुए युवराज के शब्द पापा मुझे बचा लो मैं डूब रहा हूं। उन्हें अभी भी कचोट रहे हैं। दर्दनाक मंजर को बयां करते वक्त उनकी आंखों में आंसुओं का सैलाब बनकर बहने लगता हैं। उन्होंने प्राधिकरण से गुहार लगाई है कि वह कोई उपाय करें, ताकि फिर किसी पिता को बेबस होकर बेटे की मौत का यह मंजर न देखना पड़े।

    crime news Five builders have been taken into custody in connection with the engineer's death. greater-noida tazza khabar tazza khabar in hindi Uttar Pradesh
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