नई दिल्ली 29 मई। राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके हौज खास एन्क्लेव में बुधवार देर रात एसी की इंडोर यूनिट में ब्लास्ट होने के बाद घर में आग लगने के कारण 80 वर्षीय रिटायर्ड IAS अधिकारी धनेंद्र कुमार की मौत हो गई. वहीं हादसे में घायल उनके बेटे का इलाज अस्पताल में चल रहा है. पुलिस के अनुसार एम्स ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान धुएं के कारण दम घुटने से रिटायर्ड IAS अधिकारी की मौत हुई है. वह 1968 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे.
शुरुआती जांच में हादसे की वजह एसी के इंडोर यूनिट में धमाका होना बताया जा रहा है। हौज खास थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है घर में उनके साथ पत्नी के अलावा बेटा और दो घरेलू सहायक रहते हैं पुलिस का कहना है कि तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दक्षिण जिला पुलिस उपायुक्त अनंत मित्तल ने बताया कि सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी धनेंद्र कुमार परिवार के साथ हौज खास स्थित आर-15 में रहते थे। मूलतः यूपी के गंगोह निवासी धनेंद्र अपने इलाके के पहले आईएएस अधिकारी थे। वह 1967 बैच के हरियाणा कैडर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी थे और विश्व बैंक के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर भी रहे थे।
मित्तल बताया कि बुधवार देर रात करीब 11:18 बजे हौज खास थाना पुलिस को पीसीआर कॉल के जरिये आग लगने की सूचना मिली। स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और अन्य एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं उस समय घर में धनेंद्र उनकी पत्नी मंजू बेटा और दो घरेलू कर्मचारी मौजूद थे। आग लगने से घर में धुआं भर गया था, जिससे परिवार के लोग बाहर नहीं निकल सके स्थानीय लोगों ने पुलिस व दमकल को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से सभी को बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल पहुंचाया। आग बुझाने के लिए दमकल विभाग की दो गाड़ियों मौके पर पहुंची थी। दमकल कर्मचारियों ने करीब 1.40 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया।
सहारनपुर के प्रतिष्ठित डॉक्टर के बेटे थे धनेंद्र
धनेंद्र कुमार सहारनपुर के गंगोह के प्रतिष्ठित डॉक्टर अमरनाथ वर्ग के पुत्र थे। उन्होंने गंगोह के हिंदू राष्ट्रीय इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त की थी। इसके बाद वह प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए और हरियाणा कैडर में अपनी सेवाएं दी। लंबे प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान हरियाणा के मुख्य सचिव, सीसीआई चेयरमैन, नेशनल हाईवे अथॉरिटी के चेयरमैन, टेलीकॉम सचिव, जीएसटी चेयरमैन और एक्साइज कमिश्नर बने। बाद में उन्होंने विश्व बैंक में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में भी सेवाएं दीं। गंगोह क्षेत्र के विकास में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

