Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • 16 मेट्रो स्टेशन बंद होने से सुप्रीम कोर्ट पहुंची वकीलों की परेशानी
    • पोस्टर बैनरों में प्रदर्शित व्यापारिक संस्थानों से राजस्व की हो वसूली
    • सुरक्षाबलों का मनोबल बना रहे आम आदमी भी अपनी बात कह सके
    • जिम्बाब्वे के खिलाफ जीत की पटरी पर लौटने के इरादे से मैदान में उतरेगी
    • 10वीं में फेल होने पर भागा बेटा 30 साल बाद घर लौटा, बूढ़े माता-पिता से मिलकर फूट-फूटकर रोया
    • श्रीलंका को भारतीय अंडर-19 टीम ने 211 रनों से हराया
    • Samsung AI स्मार्ट चश्मे लॉन्च, अब रियल टाइम में ट्रांसलेट होगी बातचीत
    • तलाक के एक महीने बाद ही मौनी रॉय को मिला नया ब्वॉयफ्रेंड
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»2025 में 345 गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों का पंजीकरण खत्म होने के बाद भी देश में 2500 अभी भी रजिस्टर्ड, हर माह तीन कर रहे हैं आवेदन
    देश

    2025 में 345 गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों का पंजीकरण खत्म होने के बाद भी देश में 2500 अभी भी रजिस्टर्ड, हर माह तीन कर रहे हैं आवेदन

    adminBy adminJuly 2, 2026No Comments5 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    अगर राजनीतिक दलों की चर्चा करें तो मुख्य रुप से देश में कांग्रेस, भाजपा, शिवसेना, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, रालोद जैसे कुछ पांच छह दर्जन दल होंगे जो कहीं ना कहीं अपना अस्तित्व बनाए रखते होंगे। लेकिन फिलहाल वर्ष २०२५ में ३४५ गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दलों के पंजीकरण खत्म किए जाने के बाद भी देश में लगभग २५०० गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल बचे बताए जाते हैं। स्थिति यह है कि २०२६ में अभी छह माह बीते हैं लेकिन अब तक नए २१ दल पंजीकरण के लिए आवेदन कर चुके हैं। सियासी दल इतनी बड़ी तादात में क्यों गठित किए जाते हैँ तो जवाब है कि बड़े दलों के साथ चुनाव में उनके सहयोगी के रुप में चुनाव लड़ने या उनका समर्थन करने की एवज में जहां तक चर्चा सुनी जाती है किसी दल के कुछ लोगों को पद तो कुछ को एक दो क्षेत्रोंसे चुनाव लड़ाने का मौका मिल जाता है। या फिर बिल्ली के भाग छीका टूटने के समान बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में हुई टूट के बाद अचानक चर्चा में आई नेशनललिस्ट सिटीजनस पार्टी आफ इंडिया रातो रात भाजपा का सबसे बड़ा घटक दल बन गई। ममता बनर्जी की टीएमसी से सांसद बने नेताओं ने बंगाल में ममता बनर्जी को मिली हार और भाजपा सरकार बनने के बाद जो टूट हुई उसके काफी सांसद अलग हो गए और अपनी पार्टी एनसीपीआई बना ली। वरना सम्मेलन या आंदोलन कर लिया या धरना प्रदर्शन तक में ही यह राजनीतिक दल अपना अस्तित्व अपने जिले और अन्य तो कुछ जगहों पर अपना अस्तित्व बनाए रखते हैं। वरना एक समय में केंद्र में शक्ति संतुलन और यूपी में सरकार बनाने वाली बहुजन समाज पार्टी का जानकार कहते हैं कि कई बार सीएम रह चुकी मायावती की पार्टी में यूपी में एक विधायक है और वह बहुमत नहीं है जो हमेशा रहा है। फिर भी हर माह तीन राजनीतिक दलों के रुप में पंजीकृत करने की आ रही खबरों से पता चलता है कि कुछ ना कुछ जरुर है जो इतने लोग एनजीओ या संस्थाएं चलाने के बजाय राजनीतिक दल पंजीकृत कराते हैं। कई लोगों का यह कहना है कि यह बड़े दलों के लिए मोहरे का काम करते हैं क्योंकि बड़ी पार्टिया अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए विपक्षी दल के प्रत्याशी की जाति का उम्मीदवार उनमें से उतार देते हैं। कभी ऐसा जीता हो यह तो नहीं कह सकते लेकिन वोट कटने से बड़े दल के उम्मीदवारों को फायदा जरुर पहुंच जाता है। ऐसा नहीं कि निर्दलीय चुनाव नहीं जीतते। मगर आम आदमी की इस बात से मैं सहमत हूं कि राजनीतिक दलों के पंजीकरण के लिए बनी नियमावली में अब कुछ और सुधार होना चाहिए। क्योंकि अगर कोई राजनीतिक दल के रुप में पंजीकृत हो गया तो उसका हिसाब किताब रखने के संदर्भ में जो कार्रवाई होती है उस पर समय और पैसा दोनों ही खर्च होते हैं। जैसे जैसे जागरुका और चुनाव प्रणाली में सुधार हो रहा है वैसे ही दलों के पंजीकरण के लिए निर्वाचन आयेाग को बदलाव करने की आवश्यकता है। जितना पता चलता है भारत के चुनाव आयोग द्वारा वर्तमान में 6 मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दल हैं । इन पार्टियों में भारतीय जनता पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), नेशनल पीपुल्स पार्टी हैं।
    वहीं क्षेत्रीय पार्टियों में समाजवादी पार्टी, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस, जनता दल (यूनाइटेड), राष्ट्रीय जनता दल, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईडीएमके), शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी व तेलुगु देशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, भारत राष्ट्र समिति, शिरोमणि अकाली दल, बीजू जनता दल आदि प्रमुख हैं।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

    sampadkiya tazza khabar tazza khabar in hindi
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    16 मेट्रो स्टेशन बंद होने से सुप्रीम कोर्ट पहुंची वकीलों की परेशानी

    July 23, 2026

    पोस्टर बैनरों में प्रदर्शित व्यापारिक संस्थानों से राजस्व की हो वसूली

    July 23, 2026

    सुरक्षाबलों का मनोबल बना रहे आम आदमी भी अपनी बात कह सके

    July 23, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.