लखनऊ, 28 अप्रैल (ता)। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से जारी जेई भर्ती में बीटेक व बीई डिग्रीधारकों को शामिल करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जब विज्ञापन में सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा को ही अनिवार्य योग्यता निर्धारित किया गया है, तो डिग्रीधारकों को स्वतः पात्र नहीं माना जा सकता।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर, मनीष कुमार की खंडपीठ ने प्रेजुडेंट इंजीनियर वेलफेयर एसोसिएशन और अन्य की याचिका खारिज कर यह आदेश पारित किया। याचिका में डिग्रीधारकों ने खुद को डिप्लोमाधारकों के समान मानने की मांग कर सात मार्च 2024 को चयन आयोग द्वारा सिर्फ डिप्लोमाधारकों को ही आवेदन का मौका देने वाले विज्ञापन को चुनौती दी थी। न्यायालय ने आदेश में कहा कि डिग्री और डिप्लोमा दो अलग-अलग शैक्षिक योग्यताएं हैं, बिना सरकारी आदेश डिग्री को डिप्लोमा के समकक्ष नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि भर्ती करने वाली संस्था को आवश्यक योग्यता तय करने का अधिकार है और न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकता। याचियों की दलील थी कि वे अधिक योग्य हैं, इसलिए शामिल किया जाए।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति मनीष कुमार की खंडपीठ ने ग्रेजुएट इंजीनियर वेलफेयर एसोसिएशन सहित अन्य याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने 7 मार्च 2024 को जारी उस विज्ञापन को चुनौती दी थी, जिसमें सिर्फ डिप्लोमाधारकों को आवेदन की अनुमति दी गई थी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि डिग्री और डिप्लोमा दो अलग-अलग शैक्षणिक योग्यताएं हैं। बिना किसी सरकारी शासनादेश के इन्हें समान नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती एजेंसी को योग्यता तय करने का अधिकार है और इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वे डिप्लोमाधारकों से अधिक योग्य हैं, इसलिए उन्हें भी भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया, लेकिन अदालत ने पाया कि वह मामला इस प्रकरण से अलग परिस्थितियों वाला था।
अंततः अदालत ने कहा कि चूंकि डिग्री को डिप्लोमा के बराबर घोषित करने वाला कोई शासनादेश मौजूद नहीं है, इसलिए डिग्रीधारी उम्मीदवार इस भर्ती के लिए पात्र नहीं हैं।
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