Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • प्रीमियम इलेक्ट्रिक बाइक्स हाई स्पीड पर भी नहीं डगमगाती हैं, कमाल की है टेक्नोलॉजी
    • अनुबंध के अनुसार गुणवत्ता युक्त सड़कें आदि का निर्माण ना करने वाले ठेकेदार व कंपनियां डाली जाएं काली सूची में, दोबारा कराया जाए निर्माण
    • सड़क सुरक्षा के नियमों की धज्जियां उड़ाने में खोदकर पाइप डालने वाले अधिकारी और ठेकेदार भी कम जिम्मेदार नहीं है, इन पर कसी जाए लगाम
    • अभिषेक शर्मा के पेट में इन्फेक्शन के कारण अस्पताल में भर्ती कराया
    • शाहिद कपूर का निर्देशक विशाल भारद्वाज को ओ रोमियो के लिए थैंक्स
    • ओटीटी पर देसी रग्ड लुक में दिखाया 7 सितारों ने जलवा
    • बिहार के 20 हजार छात्र-छात्राएं एक कालेज में आठ कमरों में अध्ययनरत
    • निकांत जैन पर अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के मामले को हाईकोर्ट ने किया रद
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»पुलिस-मजिस्ट्रेटों के दिमाग में कानून को लेकर भ्रम
    देश

    पुलिस-मजिस्ट्रेटों के दिमाग में कानून को लेकर भ्रम

    adminBy adminJanuary 19, 2026No Comments11 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    प्रयागराज,19 जनवरी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि पुलिस व न्यायिक मजिस्ट्रेटों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ताकि उन्हें पता चले कि कपट व आपराधिक न्यास भंग जुड़वां अपराध नहीं है, दोनों में अंतर है, दोनों का अस्तित्व अलग है और दोनों एक समय एकसाथ नहीं हो सकते। कोर्ट ने कहा कि पुलिस व मजिस्ट्रेट के दिमाग में कानून को लेकर भ्रम है। वे आईपीसी की धारा 406 व 420 में दंडनीय अपराध का अंतर समझ नहीं पा रहे हैं।

    यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने प्रभा सिंह व एक अन्य की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने इसी के साथ एसीजेएम गोरखपुर द्वारा आईपीसी की धारा 406, 420, 467, 468, 471 व 120बी के तहत याची को जारी सम्मन आदेश रद्द कर दिया और और दिल्ली रेस क्लब केस में स्थापित सुप्रीम कोर्ट की विधि व्यवस्था के अनुसार नए सिरे से आदेश करने के लिए प्रकरण वापस कर दिया है। याचियों की ओर से अधिवक्ता अक्षय सिंह रघुवंशी, अरविंद सिंह व बीके सिंह रघुवंशी का कहना था कि कपट व आपराधिक न्यास भंग के अपराध में काफी अंतर है। दोनों अन्योन्श्रित नहीं है बल्कि भिन्न है।

    दिल्ली रेस क्लब केस में कोर्ट ने साफ कहा है कि कपट में मंशा महत्वपूर्ण है, जो शुरू से ही झूठ व बेईमानी, धोखे से संपत्ति प्राप्त कर हड़पने की होती है जबकि न्यास भंग में विस्वास के साथ वैध तरीके से संपत्ति दी जाती है और बाद में विश्वास तोड़कर संपत्ति हड़पी जाती है। इसलिए दोनों अपराध एकसाथ नहीं किए जा सकते। अदालत से दोनों धाराओं में सम्मन जारी करना उचित नहीं है। मामला गोरखपुर के खोराबार थाने से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि कपट आईपीसी की धारा 415 में है और धारा 420 में दंडनीय है जबकि आपराधिक न्यास भंग धारा 405 में है जो धारा 406 में दंडनीय अपराध है।
    एक अपराध होगा तो उसी समय दूसरा नहीं हो सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि दोनों धाराओं में एकसाथ आपराधिक केस कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती है। हाई कोर्ट के आदेश बाद गोरखपुर कोर्ट मामले में फिर से सुनवाई करनी होगी।

    allahabad-high-court tazza khabar tazza khabar in hindi uttar-pradesh news
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    प्रीमियम इलेक्ट्रिक बाइक्स हाई स्पीड पर भी नहीं डगमगाती हैं, कमाल की है टेक्नोलॉजी

    February 11, 2026

    अनुबंध के अनुसार गुणवत्ता युक्त सड़कें आदि का निर्माण ना करने वाले ठेकेदार व कंपनियां डाली जाएं काली सूची में, दोबारा कराया जाए निर्माण

    February 11, 2026

    सड़क सुरक्षा के नियमों की धज्जियां उड़ाने में खोदकर पाइप डालने वाले अधिकारी और ठेकेदार भी कम जिम्मेदार नहीं है, इन पर कसी जाए लगाम

    February 11, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.